सिंधु जल संधि पर OIC के सामने पाकिस्तान ने उठाया मुद्दा, भारत ने PCA के फैसले को नहीं माना
नई दिल्ली: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में हुई OIC संपर्क समूह की बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि को भारत की ओर से ‘एबेयन्स’ में रखने का मुद्दा उठाया। उन्होंने OIC सदस्य देशों से इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के पक्ष में एकजुट रुख अपनाने की अपील की। इशाक डार ने कहा कि सिंधु जल संधि एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसमें किसी एक पक्ष को इसे एकतरफा निलंबित करने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने भारत पर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को अपनी सुविधा के अनुसार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। ये दावे पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक रुख का हिस्सा हैं। इशाक डार ने अपने संबोधन में 31 अगस्त 2026 को जारी Court of Arbitration के फैसले का भी हवाला दिया। Permanent Court of Arbitration (PCA) के रिकॉर्ड के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान सिंधु जल संधि से जुड़े इस मामले में Court of Arbitration ने 31 अगस्त को संधि की स्थिति पर एक अवॉर्ड जारी किया था। PCA इस मामले में सचिवालय की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इस फैसले को लेकर भारत का रुख अलग है। भारत ने इस प्रक्रिया में कोर्ट के अधिकार-क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है और इस मामले में अपनी भागीदारी से इनकार किया है। इसलिए खबर में पाकिस्तान के ‘फैसले की मान्यता’ वाले दावे और भारत की आपत्ति को अलग-अलग समझना जरूरी है। इशाक डार ने अपने संबोधन में पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए सैन्य तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कश्मीर विवाद को दोनों देशों के बीच तनाव की पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ने का रास्ता बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच सैन्य टकराव ने क्षेत्रीय तनाव के जोखिम को सामने रखा है। डार ने OIC से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुट रुख बनाए रखने की अपील की। भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख पहले भी स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संधि को एबेयन्स में रखने का फैसला तब तक जारी रहेगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता। वहीं PCA की वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 को सिंधु जल संधि की स्थिति पर अवॉर्ड और Ratle परियोजना से संबंधित अंतरिम उपायों पर आदेश जारी किए गए। मामले की स्थिति PCA के रिकॉर्ड में अभी लंबित बताई गई है। इशाक डार ने OIC सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ एकजुट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने सिंधु जल संधि को भी इसी व्यापक कूटनीतिक मुद्दे के हिस्से के तौर पर उठाया।PCA के फैसले का पाकिस्तान ने दिया हवाला
पहलगाम हमले और भारत-पाक तनाव का भी जिक्र
भारत का क्या है रुख?
OIC से पाकिस्तान ने मांगा समर्थन














