गिरिडीह: विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल सम्मेद शिखरजी के मधुबन स्थित तलहटी क्षेत्र में बुधवार को आदिवासी आस्था और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय धर्म सम्मेलन का शुभारंभ पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुआ। झारखंड सहित पांच राज्यों और नेपाल से आदिवासी समाज के प्रतिनिधि इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं।

जुग जाहेर थान में मरांग बुरु की पूजा

सम्मेलन की शुरुआत मधुबन के जुग जाहेर थान में स्थापित मरांग बुरु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर की गई। पूजा का नेतृत्व हेमंत सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा ने किया। उनके नेतृत्व में आदिवासी समाज के पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने भाग लेकर अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा प्रकट की।

पांच राज्यों और नेपाल से पहुंचे प्रतिनिधि

दो दिवसीय सम्मेलन में झारखंड के सभी जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम से आदिवासी समाज के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। नेपाल से भी प्रतिनिधियों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है। अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया है।

आस्था और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर चर्चा

पूजा-अर्चना के बाद मधुबन की तलहटी में धर्म सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने मरांग बुरु की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य आदिवासी समाज में मरांग बुरु के प्रति आस्था और श्रद्धा को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना है।

वक्ताओं ने मरांग बुरु को आदिवासी समाज की आस्था और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के संरक्षण के लिए गंभीर पहल की जरूरत है।

सरकार से सकारात्मक पहल की अपील

सम्मेलन के माध्यम से राज्य सरकार से भी मरांग बुरु से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार करने और आदिवासी समाज की भावनाओं एवं मांगों के अनुरूप सकारात्मक कदम उठाने की अपील की जाएगी। अगले दो दिनों तक विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में महावीर मुर्मू, दिलीप मुर्मू, शशांक बेसरा, महेश मरांडी सहित मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति के कई सदस्य और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सम्मेलन को लेकर मधुबन क्षेत्र में समुदाय के लोगों का उत्साह देखने को मिला।