देश में कितने हैं दिमागी नक्सल? RTI के जवाब में गृह मंत्रालय ने बताई यह बात
नई दिल्ली: देश में पिछले कुछ समय से 'दिमागी नक्सल' शब्द को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चर्चा में रही है। इस बीच सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा है कि देश में 'दिमागी नक्सल' के रूप में चिन्हित लोगों का कोई आंकड़ा संकलित नहीं किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक उपाध्याय नामक व्यक्ति ने गृह मंत्रालय में आरटीआई आवेदन देकर पूछा था कि देश में कितने लोगों को 'दिमागी नक्सल' के रूप में चिह्नित किया गया है। जवाब में मंत्रालय ने बताया कि इस श्रेणी के लोगों का कोई ब्योरा उसके पास संकलित नहीं है। 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक बहस के दौरान किया गया, जिसके बाद यह चर्चा में आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक संबोधन में इस शब्द के इस्तेमाल के बाद भाजपा नेताओं और समर्थकों के बीच भी यह प्रचलित हुआ। इसके बाद लेखकों और टिप्पणीकारों ने भी अपने लेखों में इस शब्द का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि वे 'दिमागी नक्सल' हैं, क्योंकि वे सरकार से सवाल करते हैं। कांग्रेस ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सरकार से सवाल पूछने वालों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। पार्टी ने 'आंदोलनजीवी', 'परजीवी' और 'नाराज फूफा' जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी आलोचना की थी। गृह मंत्रालय के बताए गए जवाब के अनुसार, 'दिमागी नक्सल' के रूप में चिह्नित लोगों की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा संकलित नहीं किया जाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि देश में ऐसे किसी व्यक्ति के होने या न होने की पुष्टि मंत्रालय ने की है। जवाब केवल यह बताता है कि इस श्रेणी से संबंधित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।कैसे चर्चा में आया 'दिमागी नक्सल' शब्द?
विपक्ष ने भी जताई थी प्रतिक्रिया
आरटीआई के जवाब का क्या मतलब है?














