विक्टोरिया: दुनिया के विशालकाय कछुओं के संरक्षण को लेकर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। सेशेल्स के अल्डाब्रा एटोल पर रहने वाले अल्डाब्रा विशालकाय कछुओं की आबादी करीब 1.80 लाख तक पहुंच गई है। हालिया अध्ययन में सामने आया यह आंकड़ा इस प्रजाति के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले साल सेशेल्स के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन विशालकाय कछुओं को देखा था।

सेशेल्स की आबादी से भी ज्यादा कछुए

सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन (SIF) और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में अल्डाब्रा एटोल पर रहने वाले कछुओं की आबादी का आकलन किया गया। अध्ययन के मुताबिक, यहां कछुओं की संख्या लगभग 1,80,000 तक पहुंच चुकी है। वहीं, सेशेल्स की कुल आबादी करीब 1.22 लाख बताई जाती है। इस तरह अल्डाब्रा एटोल पर रहने वाले कछुओं की संख्या देश की मानव आबादी से भी अधिक है।

शोधकर्ताओं ने 2018 से 2022 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण कर यह अनुमान तैयार किया। अध्ययन के निष्कर्ष वैज्ञानिक पत्रिका Ecology and Evolution में प्रकाशित हुए हैं। इससे पहले 1990 के दशक के अंत में इन कछुओं की आबादी करीब एक लाख बताई गई थी। नए आंकड़े लंबे समय से चल रहे संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं।

दुनिया में कहां पाए जाते हैं ये विशालकाय कछुए?

अल्डाब्रा विशालकाय कछुआ दुनिया के सबसे बड़े कछुओं में शामिल है। अल्डाब्रा एटोल इनका प्रमुख प्राकृतिक आवास है। विशालकाय कछुओं की एक अन्य प्रमुख आबादी गैलापागोस द्वीपसमूह में भी पाई जाती है। अल्डाब्रा एटोल अपनी समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।

सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. फ्रौके फ्लिशर-डोजली के मुताबिक, एटोल पर स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले 1.80 लाख से अधिक विशालकाय कछुए लंबे समय तक किए गए संरक्षण प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने इसे सेशेल्स और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए उत्साहजनक उपलब्धि बताया।

कभी एक हजार से भी कम रह गई थी आबादी

आज बड़ी संख्या में मौजूद इन कछुओं का इतिहास संघर्ष से भरा रहा है। 19वीं सदी में बड़े पैमाने पर शिकार के कारण इनकी आबादी में भारी गिरावट आई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, एक समय इनकी संख्या एक हजार से भी कम रह गई थी। इससे इस प्रजाति के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

कछुओं को बचाने के लिए संरक्षण के प्रयास तेज किए गए। वर्ष 1981 में अल्डाब्रा एटोल को संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र घोषित किया गया। इसके अगले वर्ष, 1982 में, इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसके बाद आवास की सुरक्षा और शिकार पर नियंत्रण जैसे उपायों ने इनके संरक्षण में अहम भूमिका निभाई।

जलवायु परिवर्तन अब भी बड़ी चुनौती

आबादी में बढ़ोतरी के बावजूद इन विशालकाय कछुओं का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अध्ययन में जलवायु परिवर्तन से जुड़े संभावित खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। लंबे समय तक पड़ने वाला सूखा इनके भोजन और छाया की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा समुद्र के बढ़ते जलस्तर से एटोल के निचले इलाकों और कछुओं के प्राकृतिक आवास पर खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संरक्षण की इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी, प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की रणनीति जरूरी है।

दुनिया का सबसे उम्रदराज कछुआ भी चर्चा में

विशालकाय कछुओं की चर्चा के बीच जोनाथन का नाम भी उल्लेखनीय है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, जोनाथन दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर माना जाता है। उसे वर्ष 1882 में सेंट हेलेना द्वीप ले जाया गया था। उस समय उसकी उम्र करीब 50 वर्ष आंकी गई थी। हालांकि, जोनाथन अल्डाब्रा एटोल पर नहीं, बल्कि सेंट हेलेना द्वीप पर रहता है।