हुरहुरू खास महल जमीन विवाद योगेंद्र साव हाईकोर्ट अंतरिम राहत
हजारीबाग: शहर के हुरहुरू स्थित खास महल जमीन
विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित जमीन पर बने निर्माण
को ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की
अदालत ने 5 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के बाद प्रतिवादियों को अगले
आदेश तक तोड़फोड़ की कार्रवाई स्थगित रखने का निर्देश दिया। इस मामले में राज्य
सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। यह विवाद पूर्व
मंत्री योगेंद्र साव से जुड़ी जमीन और सितंबर में प्रशासन की ओर से की गई अतिक्रमण
हटाने की कार्रवाई के बाद एक बार फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट में मुजीबुर
रहमान की ओर से दायर याचिका में संबंधित जमीन पर बने निर्माण को ध्वस्त करने से
रोकने की मांग की गई थी। याचिका में प्लॉट संख्या 872/1235, 873/1336 और 893/1337, होल्डिंग नंबर 302 तथा थाना नंबर 157 की जमीन का उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जमीन पर दोबारा कब्जा दिलाने के संबंध में
हजारीबाग उपायुक्त की अनुशंसा की जानकारी उन्हें अब तक नहीं दी गई है। यह भी कहा
गया कि जमीन पर बनी चहारदीवारी का एक हिस्सा पहले ही तोड़ा जा चुका है और शेष
निर्माण को भी ध्वस्त किए जाने की आशंका है। दोनों पक्षों को
सुनने के बाद अदालत ने संबंधित निर्माण को ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई अगले
आदेश तक स्थगित रखने का निर्देश दिया। हुरहुरू के
कैंटोनमेंट मौजा स्थित खास महल जमीन को लेकर विवाद 18 सितंबर 2026 को सामने आया था। उस दिन सदर
अंचलाधिकारी सह खास महल पदाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम पुलिस बल और
जेसीबी के साथ मौके पर पहुंची थी। मीडिया रिपोर्टों के
अनुसार, प्रशासन ने संबंधित
जमीन को सरकारी खास महल भूमि बताते हुए वहां बनी पीसीसी सड़क और गौशाला के शेड को
हटाने की कार्रवाई की थी। इसी दौरान पूर्व
मंत्री योगेंद्र साव मौके पर पहुंचे और कार्रवाई की प्रक्रिया तथा संबंधित आदेश की
प्रति को लेकर अधिकारियों से सवाल किए थे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी
नोकझोंक भी हुई थी। प्रशासन का पक्ष रहा
है कि संबंधित जमीन सरकारी खास महल भूमि है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
नियमानुसार की जा रही है। दूसरी ओर, योगेंद्र साव ने जमीन के पुराने राजस्व अभिलेखों, पट्टे के नवीनीकरण और पुनर्ग्रहण की
प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की थी। इस मामले में जमीन के
स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। योगेंद्र साव ने
दावा किया था कि संबंधित जमीन के रजिस्टर-2 में अब भी मोहम्मद एहसान का नाम दर्ज
है। उन्होंने पुराने अभिलेखों और पट्टे से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग भी
की थी। हालांकि, जमीन के स्वामित्व, पट्टे की वैधता और कब्जे के अधिकार का
अंतिम निर्धारण संबंधित राजस्व अभिलेखों तथा सक्षम प्राधिकारियों के निष्कर्षों के
आधार पर ही होगा। इसी बीच जिले में खास
महल जमीन के सर्वेक्षण और अतिक्रमण से जुड़े मामलों की समीक्षा भी की गई थी।
उपायुक्त हेमंत सती की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा
कर संबंधित अधिकारियों को समेकित रिपोर्ट तैयार करने और पुनर्ग्रहित खास महल जमीन
पर अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट के अंतरिम
आदेश के बाद संबंधित निर्माण को ध्वस्त करने की आगे की कार्रवाई फिलहाल स्थगित
रहेगी। राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करना है। इसके बाद
मामले में आगे सुनवाई होगी।याचिका में निर्माण
तोड़ने पर रोक लगाने की मांग
सितंबर में अतिक्रमण
हटाने पहुंचा था प्रशासन
जमीन के पुराने
रिकॉर्ड और लीज पर भी विवाद
चार सप्ताह बाद फिर
होगी सुनवाई














