विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद दिया गया पहला भाषण अब नई बहस का कारण बन गया है। अपने संबोधन में विजय ने कहा था कि उन्होंने गरीबी और भूख को करीब से देखा है। लेकिन उनके साथ स्कूल में पढ़ चुके लेखक और कॉलमिस्ट  मनु जोसेफ   ने इस दावे को बकवास बताते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं। मनु जोसेफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि विजय उनके साथ तीसरी क्लास में  लोयोला स्कूल  में पढ़ते थे। उन्होंने लिखा कि विजय के पिता फिल्ममेकर थे और उन्होंने अपने बेटे के लिए फिल्म इंडस्ट्री में करियर का रास्ता पहले से तैयार किया हुआ था। मनु जोसेफ ने कहा  विजय का यह कहना कि वे गरीबी में पले बढ़े और भूख जानते हैं  पूरी तरह गलत है। हो सकता है उनके परिवार को कभी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा हो  लेकिन यह तमिलनाडु की आम गरीबी जैसी स्थिति नहीं थी। उन्होंने आगे लिखा कि कई अमीर परिवारों के लोग पैसे की कमी और गरीबी को एक जैसा समझ लेते हैं  जबकि दोनों में बड़ा फर्क होता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले भाषण में विजय ने खुद को साधारण परिवार से आने वाला आम आदमी बताया था। उन्होंने कहा था कि वे किसी राजनीतिक वंश से नहीं आते और जनता के बीच से उठकर यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जीवन में संघर्ष  कठिनाइयों और अपमान का सामना किया है। विजय ने अपने संबोधन में पारदर्शी सरकार  सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिया था। साथ ही उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए जनता से समय मांगा था। मनु जोसेफ के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स ने विजय के समर्थन में लिखा कि संघर्ष सिर्फ आर्थिक नहीं  व्यक्तिगत और पेशेवर भी हो सकता है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या नेता जनता से जुड़ने के लिए अपनी पृष्ठभूमि को बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं। फिलहाल विजय या उनकी पार्टी की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।