आबादी बढ़ाने की नीति पर उठे सवाल
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन
चंद्रबाबू नायडू द्वारा जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए तीसरे बच्चे पर 30
हजार और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये देने की घोषणा के बाद देश
में नई बहस शुरू हो गई है। नायडू ने कहा है कि राज्य में जन्म दर
घट रही है और कई परिवार एक या दो बच्चों तक सीमित हो रहे हैं। इसी को देखते हुए यह
प्रोत्साहन योजना लाई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार
भारत में फर्टिलिटी रेट लगातार घट रही है। 1950 के दशक में जहां एक महिला औसतन 6
बच्चों को जन्म देती थी वहीं 2025 30 के बीच यह दर 2 05 और 2050 55 तक 1 79 रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम जन्म दर के कारण भविष्य में
बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2050
तक भारत में बुजुर्ग आबादी 34 करोड़ से अधिक हो सकती है। भारत पहले ही दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है
और संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार 2050 तक आबादी 167 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में बढ़ती आबादी के साथ रोटी पानी
और आवास जैसी मूलभूत जरूरतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों
के मुताबिक देश में बड़ी संख्या में लोग अब भी पौष्टिक भोजन से वंचित हैं और
कुपोषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के
अनुसार प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है। कई बड़े शहरों में भूजल संकट
की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है। तेजी से बढ़ते
शहरीकरण के कारण भविष्य में करोड़ों नए घरों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञ मानते हैं
कि आबादी बढ़ने के साथ आवास और बुनियादी ढांचे पर दबाव भी बढ़ेगा। एक पक्ष का मानना है कि घटती जन्म दर और वृद्ध आबादी को देखते
हुए ऐसी नीतियां जरूरी हो सकती हैं। वहीं दूसरा पक्ष सवाल उठा रहा है कि जब
संसाधनों पर पहले से दबाव है तो आबादी बढ़ाने की नीति दीर्घकाल में नई चुनौतियां
पैदा कर सकती है।















