रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के कोईया गांव में भैरवी जलाशय से निकलने वाली नहर से प्रभावित किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों ने भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजा देने की मांग उठाई और चेतावनी दी कि जब तक मुआवजा नहीं दिया जाएगा  तब तक नहर निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता संतोष कुमार महतो ने की। इस दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक  जिला सचिव कयूम मलिक तथा राज्य परिषद सदस्य घनेनाथ चौधरी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

1984-85 में हुआ था भूमि अधिग्रहण

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि वर्ष 1984-85 में भैरवी जलाशय और उससे निकलने वाली नहर के निर्माण के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण मात्र 60 रुपये और 90 रुपये प्रति डिसमिल की दर से किया गया था।

उन्होंने दावा किया कि भूमि अधिग्रहण  पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम  2013 के अनुसार यदि अधिग्रहित भूमि का निर्धारित अवधि तक उपयोग नहीं किया जाता है  तो अधिग्रहण निरस्त माना जा सकता है। इसी आधार पर किसान वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

बिना मुआवजा नहीं होने देंगे काम

महेंद्र पाठक ने आरोप लगाया कि किसानों को उचित मुआवजा दिए बिना प्रशासन जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदारों और बिचौलियों के माध्यम से किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री  मुख्य सचिव  जल संसाधन मंत्री  रामगढ़ उपायुक्त  स्थानीय सांसद और विधायक से हस्तक्षेप कर किसानों को न्याय दिलाने की मांग की।

30 जून को हजारीबाग जाने का निर्णय

बैठक में निर्णय लिया गया कि किसान अपनी मांगों को लेकर 30 जून को हजारीबाग जाएंगे और संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

किसानों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प

राज्य परिषद सदस्य घनेनाथ चौधरी ने कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि किसानों के मुद्दों से दूर हैं और कहा कि किसान अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेंगे।

बैठक में उपस्थित किसानों ने एकजुट होकर उचित मुआवजा मिलने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।