जामताड़ा एसआईआर के खिलाफ सीपीआईएम की नुक्कड़ सभा, चुनाव आयोग पर लगाए आरोप; सीईसी के इस्तीफे की मांग
जामताड़ा: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के विरोध में शुक्रवार को जामताड़ा के सुभाष चौक पर सीपीआईएम
जिला कमेटी की ओर से नुक्कड़ सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में जिला कमेटी के
सदस्यों के साथ पार्टी के राज्य स्तरीय नेताओं ने भी हिस्सा लिया। सभा के दौरान कार्यकर्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में नारेबाजी की और इसे रद्द करने
की मांग की। साथ ही पार्टी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के
इस्तीफे की मांग भी उठाई। सभा को संबोधित करते हुए सीपीआईएम के
राज्य महासचिव विप्लव प्रकाश
ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग
पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों
में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। पार्टी
की ओर से इन दावों को लेकर एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा और उसे रद्द करने की मांग
की गई। विप्लव प्रकाश ने कहा कि पार्टी की ओर
से 26
सितंबर से 2 अक्टूबर तक इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखना जरूरी है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करते हुए कहा कि मांगें पूरी नहीं
होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वहीं,
जिला सचिव चंडी दास पुरी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं
के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पात्र
लोगों के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखना जरूरी है और पार्टी इस मुद्दे पर
लगातार आवाज उठा रही है। गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर देशभर में
राजनीतिक बहस और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के
अनुसार, झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर
2026 को प्रकाशित की जानी है,
जबकि दावे और आपत्तियों की अवधि 5 अगस्त से 4 सितंबर तक निर्धारित
थी। 2 अक्टूबर को देश के विभिन्न हिस्सों में एसआईआर को लेकर विरोध
प्रदर्शन भी हुए। दिल्ली में सीपीआई(एम),
एसएफआई और डीवाईएफआई से जुड़े लोगों ने
निर्वाचन आयोग और एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया। जामताड़ा में आयोजित नुक्कड़ सभा के
माध्यम से सीपीआईएम नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने, पात्र मतदाताओं के
नाम सुरक्षित रखने और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों
पर कार्रवाई की मांग की।














