हजारीबाग पंचकर्म अस्पताल संसाधन संकट
हजारीबाग में आयुष मंत्रालय द्वारा 55
लाख रुपए की लागत से स्थापित
पंचकर्म प्रशिक्षण सह सेवा केंद्र पिछले
एक वर्ष से संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है। अक्टूबर 2024
में शुरू हुआ यह पंचकर्म केंद्र पुरानी
बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा था लेकिन आवश्यक उपकरणों और विशेषज्ञों के अभाव में यह अपनी पूरी
क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है।नया समाहरणालय के पास स्थित इस पंचकर्म
केंद्र में प्रतिदिन 150 से
200 मरीज OPD में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं जिन्हें निशुल्क
दवाएं दी जा रही हैं। वहीं पंचकर्म थेरेपी का लाभ रोजाना केवल 8
से 10 मरीजों को ही मिल पा रहा है।केंद्र में फिलहाल केवल 6
बेड 2 चौकी
और एक वार्मर उपलब्ध है। पंचकर्म इलाज के लिए जरूरी लीच थेरेपी रक्तमोक्षण कपिंग थेरेपी
बाथ टब और आधुनिक थेरेपी मशीनें यहां मौजूद नहीं हैं। इलाज में प्रयुक्त होने वाली जड़ी बूटियां
तिल का तेल ब्राह्मी आंवला तेल और उड़द का आटा जैसी सामग्री भी उसी सीमित फंड से
खरीदी जा रही है जो जिले के सभी आयुष केंद्रों के लिए निर्धारित है।प्रभारी
चिकित्सक डॉ. विजय तिवारी
ने बताया कि मरीजों की संख्या लगातार
बढ़ रही है। हजारीबाग के अलावा
चतरा और कोडरमा से भी मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि
न्यूनतम 5
से 6 लाख
रुपए का अतिरिक्त आवंटन
मिल जाए तो यह पंचकर्म केंद्र
सभी आवश्यक संसाधनों से लैस हो सकता है और बेहतर सेवाएं दी जा सकती हैं।गौरतलब है
कि निजी पंचकर्म इलाज पर मरीजों को
₹2000 से ₹4000 तक खर्च करना पड़ता
है जबकि इस सरकारी केंद्र से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद
है। हालांकि संसाधनों के अभाव के कारण न सिर्फ सेवा केंद्र बल्कि प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्र
की योजना भी प्रभावित हो रही है।















