दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड अंतर्गत रंगालिया पंचायत स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय बोराडगाल की बदहाली झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही है।यहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय और उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोनों मौजूद होने के बावजूद बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कारण यह है कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय बने लगभग 10 से 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक उसका भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है और उस पर ताला लटका हुआ है।स्थिति यह है कि मिडिल स्कूल के 206 छात्र और हाई स्कूल के 172 छात्र कुल 370 बच्चे, सिर्फ 5 कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय में कुल 8 शिक्षक कार्यरत हैं जिन पर इतने छात्रों की जिम्मेदारी है।विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि उच्च विद्यालय का भवन जर्जर स्थिति में है। वहां न तो शौचालय की सुविधा है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। ऐसे भवन में बच्चों को पढ़ाना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा, क्योंकि कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इसी कारण पिछले करीब 12 वर्षों से उस भवन में ताला लगा हुआ है और शिक्षकों को आज तक उसकी चाबी तक नहीं दी गई है।मिडिल स्कूल और हाई स्कूल दोनों एक ही परिसर में संचालित किए जा रहे हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों के अनुसार इस समस्या की जानकारी कई बार उच्च अधिकारियों को दी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।जब इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि इस मामले को लिखित और मौखिक रूप से उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया है लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया है।वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और वे इसकी जांच करेंगे।अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक बोराडगाल के बच्चे अव्यवस्था और संसाधनों की कमी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे और कब खुलेगा वर्षों से बंद पड़ा उच्च विद्यालय भवन।