नई दिल्ली : पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि शांति बनाए रखनी है, तो देश को हर संभावित चुनौती के लिए मजबूत सैन्य तैयारी और विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखनी होगी।

अपनी पुस्तक ‘The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries’ के विमोचन के दौरान जनरल नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों भारत के लिए अलग-अलग तरह की चुनौतियां पेश करते हैं। पाकिस्तान के साथ आतंकवाद लगातार एक बड़ी और तत्काल सुरक्षा चुनौती बना हुआ है, जबकि दीर्घकाल में चीन राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सैन्य क्षेत्रों में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि चीन को 'शत्रु' कहने के बजाय 'प्रतिस्पर्धी' कहना अधिक उचित होगा। उनके अनुसार, भारत को चीन के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि, किसी भी संभावित चुनौती या दुस्साहस को रोकने के लिए सैन्य तैयारियों को मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत ने चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं और दोनों देशों के साथ सीमा विवाद भी रहे हैं। ऐसे में दोनों देश भारत की सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बने रहेंगे, लेकिन उनकी चुनौतियों की प्रकृति अलग-अलग है।

पड़ोसी देशों की स्थिरता भी भारत के हित में

जनरल नरवणे ने नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में स्थिरता को भारत के रणनीतिक हितों से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि किसी पड़ोसी देश में अस्थिरता बढ़ने का असर सीमाओं के पार भी पड़ सकता है।

उन्होंने म्यांमार का उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों में संकट से शरणार्थियों का पलायन, तस्करी, मादक पदार्थों की आवाजाही और अवैध हथियारों जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए भारत को अपने पड़ोस में स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए।