लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलित हिंदुओं के मुद्दे को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।

लखनऊ में आयोजित ‘विभाजन की विभीषिका’ कार्यक्रम में सीएम योगी ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और कथित हत्याओं का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।

'विपक्ष के लिए अपना वोट बैंक मायने रखता है'

सीएम योगी ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई घटनाओं पर विपक्षी दलों ने कथित तौर पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को डर था कि अगर वह इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देगा तो उसका वोट बैंक प्रभावित हो सकता है।

योगी ने कहा कि जिन लोगों की नजरें 1947 में भी सत्ता पर थीं, उनकी राजनीतिक सोच आज भी नहीं बदली है। उनके मुताबिक सत्ता हासिल करने के लिए देशहित को पीछे रखने की राजनीति की जा रही है।

2024 के बाद बदला राजनीतिक समीकरण

2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति के जरिए उत्तर प्रदेश में बीजेपी को चुनौती दी थी। इसके बाद बीजेपी ने भी दलित और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर जोर दिया।

योगी आदित्यनाथ ने पहले भी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को राजनीतिक मंचों से उठाया है। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को लेकर यूपी की राजनीति में बहस तेज होने के संकेत हैं।

कांग्रेस और सपा पर भी साधा निशाना

सीएम योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने सत्ता को अपनी पारिवारिक विरासत समझ लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे दल अपने राजनीतिक हितों के लिए देश और समाज में अव्यवस्था पैदा करने का काम करते हैं।

योगी ने 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने की राजनीति के कारण देश को विभाजन का दर्द झेलना पड़ा। उन्होंने विपक्ष पर इसी तरह की राजनीति आज भी करने का आरोप लगाया।

2027 से पहले दलित वोट पर सियासी नजर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी और विपक्ष दोनों ही दल दलित वोटरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं। योगी आदित्यनाथ के ताजा बयान को भी इसी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

आने वाले महीनों में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति, दलित सुरक्षा और PDA बनाम हिंदुत्व जैसे मुद्दे यूपी की चुनावी राजनीति में प्रमुख बहस का हिस्सा बन सकते हैं।