नई दिल्ली: ढाका भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई गंगा जल संधि इस वर्ष दिसंबर 2026 में समाप्त होने जा रही है। इसे लेकर दोनों देशों के बीच नई वार्ता की संभावना को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश सरकार ने संधि के भविष्य और सीमा-पार नदियों के जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 8 जून 2026 को बांग्लादेश ने भारत से औपचारिक वार्ता शुरू करने का अनुरोध किया था। हालांकि, इस पर भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत इस विषय पर संयुक्त नदी आयोग (Joint Rivers Commission) के स्थापित तंत्र के माध्यम से तथा दोनों देशों की आपसी सहमति से उपयुक्त समय पर चर्चा करने के पक्ष में है।

क्या है गंगा जल संधि?

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 साझा नदियां हैं। इनमें गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर 12 दिसंबर 1996 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच 30 वर्षों के लिए गंगा जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे।

यह समझौता फरक्का बैराज से 1 जनवरी से 31 मई के बीच छोड़े जाने वाले पानी के बंटवारे का ढांचा तय करता है।

संधि के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार:

  • यदि फरक्का पर जल प्रवाह 70,000 क्यूसेक से कम रहता है, तो दोनों देशों को लगभग बराबर हिस्सा मिलता है।
  • यदि जल प्रवाह 75,000 क्यूसेक से अधिक होता है, तो भारत को लगभग 40,000 क्यूसेक पानी मिलता है और शेष पानी बांग्लादेश को दिया जाता है।
  • 11 मार्च से 10 मई के बीच दोनों देशों को बारी-बारी से 35,000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी संधि में शामिल है।

आगे क्या

गंगा जल संधि भारत-बांग्लादेश संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। संधि की अवधि समाप्त होने से पहले दोनों देशों के बीच नई वार्ता की संभावना है। हालांकि, फिलहाल भारत सरकार की ओर से नई वार्ता की तिथि या औपचारिक प्रक्रिया को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।