हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) के 11वें दीक्षांत समारोह को लेकर नया विवाद सामने आया है। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल को समारोह में आमंत्रित करने के तरीके पर उनके मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के प्रति नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने सांसद को केवल कार्यालय में आमंत्रण कार्ड भेजकर औपचारिकता पूरी कर दी, जबकि किसी पदाधिकारी ने फोन कर आमंत्रित करना भी जरूरी नहीं समझा।

रंजन चौधरी ने जारी बयान में कहा कि सांसद मनीष जायसवाल ने पूर्व विधायक रहते हुए भी विश्वविद्यालय को एंबुलेंस उपलब्ध कराने में सहयोग किया था। इसके अलावा केबी महिला महाविद्यालय को बस उपलब्ध कराने सहित जरूरत के समय कई स्तरों पर सहायता की है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के इतने महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन में उन्हें उचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

सीनेट सदस्य होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर सवाल

रंजन चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति के अलावा एक पूर्व सांसद अतिथि के रूप में मौजूद थे। वहीं, वर्तमान सांसद, सदर विधायक और जिले के अन्य विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही।

उन्होंने कहा कि स्थानीय सांसद और विधायक विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निकाय सीनेट के सदस्य भी होते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण आयोजन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन को व्यक्तिगत स्तर पर पहल करनी चाहिए थी।

विश्वविद्यालय को सहयोग देने वालों के सम्मान का मुद्दा उठाया

रंजन चौधरी ने सवाल उठाया कि क्या विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल समारोह आयोजित करने और विद्यार्थियों को उपाधियां वितरित करने तक सीमित है, या संस्थान के विकास में सहयोग देने वाले जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों को सम्मान देना भी उसकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान समाज और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से भी आगे बढ़ते हैं। ऐसे में संस्थान के विकास में योगदान देने वालों की उपेक्षा उचित नहीं है।

रंजन चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान और महत्व देने की बात कही।

इस बयान के सामने आने के बाद विभावि के दीक्षांत समारोह में आमंत्रण की प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्पेशल रेपोर्ट्स