दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन मनाया गया उत्तम सत्य धर्म, हजारीबाग में श्रद्धालुओं ने किया पूजन
हजारीबाग : दिगंबर जैन पंचायत
हजारीबाग के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन
श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। शहर के
दोनों दिगंबर जैन मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हुआ।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन-पाठ
और संगीतमय दशलक्षण विधान में हिस्सा लिया। अर्हं स्वधर्म शिविर
के तहत महाराष्ट्र के संभाजीनगर से पहुंचे पंडित भैया प्रशांत अन्नदाते ने उत्तम सत्य धर्म
पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि सत्य का अर्थ केवल सच बोलना नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म में पवित्रता और निर्मलता
होना भी सत्य धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।उन्होंने कहा कि
छल-कपट, अहंकार या किसी के
प्रति कटुता की भावना से जुड़ा सत्य जीवन को सही दिशा नहीं देता। भगवान महावीर और
गौतम गणधर से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने सत्य धर्म के व्यावहारिक पक्ष
को समझाया।पंडित भैया ने कहा कि
सत्य को जीवन में उतारते समय विनम्रता, करुणा और अहिंसा की भावना भी जरूरी
है। अच्छे विचार और व्यवहार के साथ जुड़ा सत्य व्यक्ति को आत्मिक शांति की ओर ले
जाता है। दोपहर में बाड़म
बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का वाचन एवं
अध्ययन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के सिद्धांतों और उनके
व्यावहारिक पक्ष को समझने का प्रयास किया।शाम को शास्त्र वाचन,
मंगल प्रवचन और भव्य महाआरती सहित कई
धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुनि श्री के अवतरण दिवस के अवसर
पर आयोजित मंगलाचरण में ओमिका विनायका ने भक्ति नृत्य
प्रस्तुत किया। समाज के बच्चों और युवाओं की प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं का
ध्यान आकर्षित किया। दशलक्षण महापर्व के
दौरान दोनों जैन मंदिरों में प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन-पाठ, दशलक्षण विधान, प्रवचन, तत्वार्थ सूत्र वाचन, संध्या आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजित किए जा रहे हैं। मंदिरों की आकर्षक सजावट और रोशनी भी श्रद्धालुओं के
आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।मीडिया हेड विजय
जैन लुहाड़िया ने बताया कि महापर्व के क्रम में अगले
दिन उत्तम
संयम धर्म मनाया जाएगा। उन्होंने समाज के श्रद्धालुओं से दोनों मंदिरों
में पहुंचकर धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने और संयम के संदेश को अपने जीवन में
अपनाने का आग्रह किया।सत्य के साथ विनम्रता
और करुणा जरूरी
तत्वार्थ सूत्र का
हुआ वाचन
कल मनाया जाएगा उत्तम
संयम धर्म














