रांची: झारखंड में डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी-फार्मा) की परीक्षा और फार्मासिस्ट निबंधन की प्रक्रिया को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की है। मरांडी का आरोप है कि निजी फार्मेसी कॉलेजों को नियमों के विरुद्ध मान्यता देने, फर्जी प्रमाणपत्रों और कथित अवैध वसूली के जरिए एक संगठित नेटवर्क संचालित किया गया।

निजी कॉलेजों की मान्यता और फर्जी निबंधन पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मरांडी ने आरोप लगाया है कि राज्य में कई निजी फार्मेसी कॉलेजों को आवश्यक मानकों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना मान्यता दी गई। उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर फार्मासिस्टों के निबंधन और कथित तौर पर जाली अस्पताल ट्रेनिंग दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी मुद्दा उठाया है।

मरांडी के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन विभागीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षा से जुड़े कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे महज प्रशासनिक लापरवाही का मामला मानने के बजाय सुनियोजित गड़बड़ी की आशंका जताई है।

2018 से शुरू हुई अनियमितताओं का किया जिक्र

मरांडी ने अपने पत्र में वर्ष 2018 से डी-फार्मा परीक्षा संचालन और निबंधन व्यवस्था में हुए बदलावों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) को सौंपे जाने के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित पारदर्शिता नहीं आ सकी। बाद में निजी संस्थानों की परीक्षाएं फिर पुरानी समिति के जिम्मे कर दिए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।

कॉलेजों की मान्यता रद्द होने को बताया गंभीर संकेत

मरांडी ने दावा किया है कि राज्य में कई निजी फार्मेसी संस्थानों के संचालन और मान्यता में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने करीब 78 संस्थानों की मान्यता रद्द किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पहले दी गई मान्यताओं की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की जांच में फार्मेसी संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं, सरकारी एनओसी और निर्धारित मानकों से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। जनवरी 2026 में 34 संस्थानों के लेटर ऑफ कंसेंट निरस्त करने की प्रक्रिया की खबर भी सामने आई थी। 

CBI और ED जांच की मांग

भाजपा नेता ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कथित अवैध वसूली, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों की पड़ताल ईडी से कराने की मांग रखी है।

उन्होंने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अस्पतालों में प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है।

डी-फार्मा परीक्षा और निबंधन पर पहले ही लग चुकी है रोक

इस मामले से जुड़ी प्रशासनिक गतिविधियों के बीच झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने 29 अक्टूबर 2026 को डी-फार्मा परीक्षाओं और फार्मासिस्ट निबंधन की प्रक्रियाओं को अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश दिया था। विभाग ने झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल और डी-फार्मा परीक्षा समिति को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे।

बाबूलाल मरांडी ने सोमवार, 2 नवंबर को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग दोहराई है। उन्होंने पत्र को सोशल मीडिया पर भी साझा किया है। फिलहाल 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले और अन्य आरोपों की स्वतंत्र जांच से ही उनकी सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।