गिरिडीह तिसरी प्रखंड के उपरैली कन्हाई गांव में अवैध खनन का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। बाबा बैजनाथ स्टोन वर्क्स को महज 2.023 एकड़ भूमि पर खनन की लीज मिली है लेकिन आरोप है कि असल खनन कार्य लीज क्षेत्र से करीब 300 मीटर दूर वनभूमि में स्थित पहाड़ी पर किया जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लीज वाली जमीन पर पत्थर नहीं होने के कारण कारोबारी वन क्षेत्र में जेसीबी और पोकलेन मशीनों से पहाड़ तोड़कर पत्थर निकाल रहे हैं। रोजाना करीब 40 हाइवा पत्थर निकाला जा रहा है, जिसे कोडरमा के डोमचांच स्थित क्रशर यूनिट तक भेजा जाता है।ग्रामीणों के मुताबिक यह अवैध खनन पिछले चार वर्षों से जारी है, लेकिन खनन विभाग वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।इस मामले में कई कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 और 33 वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 खान और खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम 1957 की धारा 4(1) और 21 इन कानूनों के अनुसार वनभूमि में बिना अनुमति खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है जबकि यहां खुलेआम इसका उल्लंघन हो रहा है।अवैध खनन के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान तेजी से खत्म हो रही है।भारी मशीनों से धूल और प्रदूषण बढ़ा पास के आदिवासी टोले में सांस और त्वचा रोग बढ़े सड़कें हाइवा के दबाव से जर्जर हो गईं भारी ड्रिल मशीनों का उपयोग, अनुमति पर सवाल बंद पड़े सरकारी स्कूल भवन पर कब्जा मशीनें और मजदूरों का ठहराव ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का गृह क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।उपरैली कन्हाई का मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है बल्कि यह पर्यावरण विनाश कानून की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह क्षेत्र बड़े पर्यावरणीय संकट में बदल सकता है।