नगर निगम चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी भाजपा को गिरिडीह में बड़ा झटका लगा है। भाजपा नेता एवं मेयर पद के दावेदार रहे नागेश्वर दास ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही किसी के पक्ष में प्रचार करेंगे।बुधवार को आयोजित एक प्रेसवार्ता में नागेश्वर दास ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव में पार्टी ने उन नेताओं की अनदेखी की है जो वर्षों से जमीनी स्तर पर संगठन के लिए काम कर रहे हैं।नागेश्वर दास ने आरोप लगाया कि जिले के कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके नाम की सिफारिश किए जाने के बावजूद पार्टी ने एक ऐसे व्यक्ति को मेयर प्रत्याशी के रूप में समर्थन दिया जो मुख्य रूप से व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पैसे के प्रभाव में एक स्थानीय डॉक्टर को प्रत्याशी बनाया गया।उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि इसी तरह निर्णय लिए जाते रहे तो पार्टी के मेहनती कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट जाएगा। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर यही मापदंड है तो जब झारखंड में भाजपा की सरकार बने तब रिम्स के किसी डॉक्टर को ही मुख्यमंत्री बना देना चाहिए क्योंकि मेहनत तो जमीनी कार्यकर्ता करते हैं और लाभ किसी और को मिल जाता है।नागेश्वर दास ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा उन पर आधिकारिक प्रत्याशी के समर्थन का दबाव बनाया गया था। साथ ही उन्होंने टिकट वितरण में आर्थिक लेन देन होने का भी दावा किया।हालांकि इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक भाजपा के जिला या प्रदेश नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नागेश्वर दास के इस्तीफे से गिरिडीह नगर निगम चुनाव के राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।