बड़कागांव  हजारीबाग होली से पहले बड़कागांव के रैयतो स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है। कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फंसाए गए निर्दोष लोगों को पाँच दिनों के भीतर न्यायालय से ज़मानत मिल गई जिससे उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है।इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि एफआईआर में गला दबाने और हथियार से हमला जैसी गंभीर धाराएँ जोड़ी गईं जबकि प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर किसी के पास कोई हथियार मौजूद नहीं था।इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से निर्दोष रैयतो को डराने और प्रताड़ित करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन के संरक्षण में झूठे मुकदमों का खेल खेला जा रहा है लेकिन रैयतो की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।अंबा प्रसाद ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि सच्चाई को सामने लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने रैयतो से एक रुपया तक नहीं लिया न ही उनके परिवारों को कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने दिए। उनके प्रयासों से ही सभी निर्दोष लोग होली से पहले अपने घर लौट सके।उन्होंने कहा कि यदि निर्दोष लोग जेल में रहते तो वे होली का त्योहार नहीं मना पाते। अंबा प्रसाद ने पुलिस प्रशासन और कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि झूठे मुकदमे और उत्पीड़न का हिसाब न्यायालय में लिया जाएगाउन्होंने दो टूक कहा कि  न्याय सिर्फ अमीरों के लिए नहीं गरीबों और रैयतो के लिए भी है और इसका जवाब सभी को देना पड़ेगा।