बक्सर फर्जी डॉक्टर ब्रह्मपुर रघुनाथपुर में झोलाछाप अस्पतालों का बढ़ता जाल
बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड और रघुनाथपुर नगर पंचायत क्षेत्र में झोलाछाप
डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों का समानांतर साम्राज्य तेजी से फैलता जा रहा है। बिना
किसी वैध मेडिकल डिग्री प्रशासनिक अनुमति और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के दो
दर्जन से अधिक अस्पताल नर्सिंग होम और
डायग्नोस्टिक सेंटर खुलेआम संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये तथाकथित अस्पताल मरीजों के
इलाज के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। सामान्य बीमारियों तक सीमित
रहने वाले झोलाछाप डॉक्टर अब सिजेरियन डिलीवरी अपेंडिक्स हर्निया और हाइड्रोसील जैसे जटिल ऑपरेशन तक करने लगे हैं। कंपाउंडर से डॉक्टर बनने का खेल सूत्रों के अनुसार इन अवैध अस्पतालों को चलाने वाले अधिकांश लोग पहले बड़े
शहरों या निजी क्लीनिकों में कंपाउंडर ड्रेसर या वार्ड बॉय के रूप में काम कर
चुके हैं। वहीं से मिली सामान्य चिकित्सा जानकारी के आधार पर अब ये खुद को
विशेषज्ञ सर्जन बताकर इलाज कर रहे हैं। इनके पास न तो नेशनल मेडिकल कमीशन का पंजीकरण है और न ही बिहार क्लीनिकल
एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कोई वैध लाइसेंस। इसके बावजूद ब्रह्मपुर बाजार रघुनाथपुर स्टेशन रोड और आसपास के इलाकों में बड़े बड़े बोर्ड लगाकर अस्पताल संचालित किए जा
रहे हैं। असुरक्षित ऑपरेशन थियेटर बढ़ता संक्रमण का खतरा इन अवैध केंद्रों में ऑपरेशन थिएटर के नाम पर छोटे और अस्वच्छ कमरों में बिना
मानकों के सर्जरी की जा रही है। कई जगह ऑक्सीजन वेंटिलेटर और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तक मौजूद नहीं हैं। आरोप है कि झोलाछाप डॉक्टर खुद ही मरीजों को बेहोशी का
इंजेक्शन देकर ऑपरेशन करते हैं। कई मामलों में हालत बिगड़ने पर मरीजों को बक्सर बनारस या पटना रेफर कर दिया जाता है जहां पहुंचने से पहले ही कुछ मरीजों की
मौत तक हो जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इन अस्पतालों तक मरीजों को पहुंचाने के लिए दलालों
और कुछ आशा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय है। गरीब और अशिक्षित परिवारों को
सस्ते इलाज का झांसा देकर इन केंद्रों तक लाया जाता है। इसके अलावा अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंका जा रहा
है जिससे संक्रमण और महामारी फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की
भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि कथित सुविधा शुल्क और मिलीभगत
के कारण इन अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अवैध अस्पतालों की जांच कर दोषियों पर सख्त
कार्रवाई की जाए।















