नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिमों के बीच ओमान का सोहर पोर्ट भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक लॉजिस्टिक मार्ग के तौर पर उभर रहा है। सोहर होर्मुज स्ट्रेट के बाहर स्थित है और समुद्र के साथ सड़क नेटवर्क के जरिए खाड़ी क्षेत्र के बाजारों से जुड़ता है। हालिया संकट के बीच भारतीय शिपर्स के लिए सोहर की उपयोगिता बढ़ी है।

भारत-सोहर फीडर सेवाओं में बढ़ोतरी

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के बाद भारत और सोहर के बीच फीडर शिप सेवाओं में करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई है। सोहर पोर्ट भारतीय लॉजिस्टिक्स कंपनियों के साथ टर्मिनल संचालन और निवेश को लेकर भी बातचीत कर रहा है।

सोहर पोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में पोर्ट ने 5.2 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो संभाला, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 52 फीसदी अधिक है। इस दौरान कंटेनर थ्रूपुट 40 फीसदी बढ़कर 5.45 लाख TEU हो गया।

भारतीय कारोबार के लिए क्यों अहम है सोहर?

सोहर पोर्ट का महत्व केवल समुद्री रास्ते तक सीमित नहीं है। यहां से सड़क नेटवर्क के जरिए UAE और सऊदी अरब समेत व्यापक GCC बाजार तक माल पहुंचाया जा सकता है। भारत और ओमान के बीच व्यापारिक संबंध भी इस कनेक्टिविटी को मजबूती देते हैं।

भारत सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 11.18 अरब डॉलर रहा। भारत-ओमान CEPA भी 1 जून 2026 से लागू हो चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के लिए नया ढांचा तैयार हुआ है।

तेल कारोबार में भी बढ़ी सोहर की भूमिका

सोहर की अहमियत ऊर्जा कारोबार में भी बढ़ी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब ने होर्मुज से जुड़े परिवहन जोखिमों के बीच सोहर के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए एशियाई खरीदारों तक कच्चा तेल पहुंचाने की व्यवस्था बढ़ाई है।

इस तरह सोहर केवल एक वैकल्पिक बंदरगाह नहीं, बल्कि समुद्री और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि, यह होर्मुज स्ट्रेट का पूर्ण विकल्प नहीं है; इसकी भूमिका मुख्य रूप से व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराने की है।

खाड़ी बाजार तक कनेक्टिविटी पर फोकस

ओमान सोहर को पोर्ट, फ्रीजोन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से जुड़े एक मल्टीमॉडल ट्रेड हब के रूप में विकसित कर रहा है। 2026 की पहली छमाही में बढ़ा कार्गो और कंटेनर ट्रैफिक इस पोर्ट की बढ़ती गतिविधि को दर्शाता है।

भारत के लिए सोहर का महत्व मौजूदा पश्चिम एशिया संकट से आगे भी देखा जा रहा है। भारत-ओमान व्यापार में बढ़ोतरी, CEPA के लागू होने और GCC बाजारों तक लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी के कारण यह मार्ग भारतीय कारोबारियों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा रहा है।