बोआ डूंगरी में करम महोत्सव में बोले जयराम महतो, ‘करमा झारखंड की संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक’
बोकारो: चंदनक्यारी प्रखंड के बोआ डूंगरी में मंगलवार को करम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेएलकेएम सुप्रीमो सह डुमरी विधायक जयराम महतो ने करम पर्व को झारखंड की संस्कृति, अस्मिता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया। जयराम महतो ने कहा कि भादो मास की एकादशी के मौके पर पूरा झारखंडी समाज प्रकृति की पूजा में लीन हो जाता है। करम झारखंडी संस्कृति का प्रमुख पर्व है, जो लोगों की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि करमा देवता को प्रकृति, फसल और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर करम डाली यानी जावा की पूजा करती हैं। इसके लिए कुंवारी लड़कियां और विवाहित महिलाएं टोकरी में जौ, गेहूं और चना बोकर जावा तैयार करती हैं और सात दिनों तक उसकी सेवा करती हैं। एकादशी की रात गांव के अखरा में करम डाली स्थापित की जाती है। इसके बाद ढोल-मांदर की थाप पर करमा-धुरमा गीत और नृत्य का आयोजन होता है। इन गीतों में प्रकृति, पेड़-पौधों, खेत-खलिहान और भाई-बहन के प्रेम का वर्णन किया जाता है। सुबह जावा को नदी या तालाब में विसर्जित करने की परंपरा है। इसके बाद बहनें अपने भाइयों को जावा देकर आशीर्वाद लेती हैं। जयराम महतो ने कहा कि करम पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का भी मंच है। उन्होंने कहा कि करम पर्व में गांव के लोग एक साथ अखरा में नाचते-गाते हैं। इस पर्व की परंपराएं प्रकृति के प्रति सम्मान और पेड़-पौधों के महत्व का संदेश देती हैं। कार्यक्रम में जेएलकेएम के केंद्रीय महासचिव अर्जुन रजवार समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।














