नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की अयोग्यता याचिका पर 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किए जाने के एक दिन बाद लोकसभा सचिवालय ने भी इन सांसदों को नोटिस भेजा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सचिवालय ने सभी सांसदों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इन मामलों में जल्द कार्रवाई करने की मांग की थी। लोकसभा सचिवालय की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद सामने आई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों को जारी किया था नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया था। हालांकि, कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और सदन के महासचिव को नोटिस जारी नहीं किया था।

अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले 27 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष को लिखित आवेदन दिया था। इसके बाद उन्होंने 12 अगस्त को स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द कार्रवाई की मांग की थी।

इन 20 सांसदों के खिलाफ है याचिका

अभिषेक बनर्जी की याचिका में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बरमा बासुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, असीत कुमार मल, जून मलियाह, मिताली बैग, अधिकारी दीपक देव, सयानी घोष, बापी हलदर, एमडी अबू ताहेर खान, कालीपद सारेन खेरवाल, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान के नाम शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला टीएमसी के भीतर सांसदों के एक बागी गुट से जुड़ा है। दावा है कि टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया है। इस गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने 17 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर NDA को समर्थन देने की घोषणा की थी।

इन सांसदों ने लोकसभा में अलग गुट के तौर पर मान्यता दिए जाने की मांग भी की है। वहीं, अभिषेक बनर्जी ने दल-बदल कानून का हवाला देते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।