बोकारो: झारखंड के बोकारो से एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां 20 साल से लापता एक व्यक्ति आखिरकार अपने परिवार के बीच लौट आया। बोकारो थर्मल क्षेत्र के गोविंदपुर गांव निवासी परशुराम महतो (46) मंगलवार को दो दशक बाद अपने घर पहुंचे। परिवार के लिए यह किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था।

परशुराम वर्ष 2006 में काम की तलाश में मुंबई गए थे। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। परिवार ने कई वर्षों तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दूसरी ओर उनकी पत्नी मालती देवी ने पति के वापस आने की उम्मीद नहीं छोड़ी और दूसरी शादी भी नहीं की।

2006 में राजस्थान में मिले थे परशुराम

मार्च 2006 में राजस्थान के कुचामन शहर में मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में एक व्यक्ति मिला था। उसे भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम लाया गया। उस समय वह अपना नाम और पता ठीक से नहीं बता पा रहा था।

आश्रम में उसका इलाज शुरू हुआ और उसे ‘प्रभुजी विष्णु’ नाम दिया गया। इलाज के बाद धीरे-धीरे उसकी याददाश्त लौटने लगी। उसे याद आया कि वह झारखंड के बोकारो का रहने वाला है।

इसके बाद आश्रम ने स्थानीय पुलिस की मदद से उसकी पहचान और परिवार की तलाश शुरू की। जांच के दौरान उसके गांव और परिजनों तक पहुंच बनाई गई।

परिवार ने 5-6 साल तक तलाश की

परशुराम के बड़े भाई कामेश्वर महतो ने बताया कि भाई के लापता होने के बाद परिवार ने करीब पांच-छह साल तक उनकी तलाश की। बाद में कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।

परशुराम के पिता का भी इस दौरान निधन हो गया। उनकी मां रत्नी देवी बेटे को याद कर अक्सर भावुक हो जाती थीं।

पत्नी ने 20 साल तक नहीं छोड़ी उम्मीद

परशुराम की पत्नी मालती देवी के लिए यह इंतजार बेहद कठिन था। शादी के बाद उनके कोई संतान नहीं हुई। इसके बावजूद उन्होंने पति के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी।

परिवार के अनुसार, मालती ने दूसरी शादी नहीं की और वर्षों तक अपने पति के लौटने का इंतजार करती रहीं। 20 साल बाद जब उन्हें पति के मिलने की खबर मिली तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

वीडियो कॉल पर हुई पहचान

बोकारो थर्मल पुलिस स्टेशन से परशुराम के भाई को फोन कर उनके मिलने की जानकारी दी गई। शुरुआत में परिवार को विश्वास नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने वीडियो कॉल के जरिए परशुराम और उनके परिजनों की बातचीत कराई।

20 साल बाद भाई को सामने देखकर परिवार भावुक हो गया। इसके बाद परिजन राजस्थान पहुंचे और परशुराम को अपने साथ बोकारो वापस लेकर आए।