अंचल कार्यालय के सामने 12 हजार CFT बालू का स्टॉक, कांग्रेस ने उठाए सवाल; जांच की मांग
पोटका: प्रखंड कार्यालय के सामने बड़े पैमाने पर बालू का स्टॉक मिलने से इलाके में सवाल खड़े हो गए हैं। खड़ीयासाईं स्थित प्रखंड कार्यालय के सामने करीब 12 हजार CFT बालू जमा होने की बात सामने आई है। नदियों से बालू उठाव पर रोक के बीच इतनी बड़ी मात्रा में बालू के स्टॉक को लेकर कांग्रेस ने प्रशासन से जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और नियमों की अनदेखी की जा रही है। पार्टी ने प्रशासन से यह पता लगाने की मांग की है कि इतना बड़ा बालू स्टॉक कहां से आया और इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई है या नहीं। खड़ीयासाईं में प्रखंड कार्यालय के सामने कथित तौर पर करीब 12 हजार CFT बालू जमा है। सरकारी कार्यालय के सामने इतने बड़े पैमाने पर बालू का स्टॉक होने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है क्योंकि बालू उठाव को लेकर पर्यावरणीय नियम और न्यायिक निर्देश लागू हैं। ऐसे में स्टॉक की वैधता और उसके स्रोत की जांच जरूरी मानी जा रही है। कांग्रेस के जिला सचिव जयराम हांसदा ने मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बालू माफिया और ठेकेदार नियमों की अनदेखी कर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के साथ मनमानी नहीं होनी चाहिए। जयराम हांसदा ने कहा कि अंचल कार्यालय के ठीक सामने इतनी बड़ी मात्रा में बालू का स्टॉक होना गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से बालू के स्रोत, स्टॉक की वैधता और संबंधित अनुमति की जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। नदियों से बालू उठाव और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में बालू का स्टॉक किस प्रक्रिया के तहत किया गया। हालांकि, बालू स्टॉक की वैधता और इसके स्रोत को लेकर अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।अंचल कार्यालय के सामने बालू का बड़ा स्टॉक
कांग्रेस ने प्रशासन से जांच की मांग की
बालू कहां से आया, जांच की मांग
NGT के आदेश के बीच उठे सवाल
प्रशासन के सामने ये बड़े सवाल















