बहरागोड़ा: झारखंड में अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने की मांग को लेकर दंड क्षेत्र मांझी समाज का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को बहरागोड़ा प्रखंड के दिघी गांव में समाज की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में समाज के लोगों ने अपनी समस्याओं को सामने रखते हुए सरकार से एससी दर्जे की मांग पर जल्द पहल करने की आवाज उठाई।

ओडिशा में दर्जा, झारखंड में उपेक्षा का आरोप

बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि पड़ोसी राज्य ओडिशा में दंड क्षेत्र मांझी समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि झारखंड में अभी तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि इसका असर समाज के बच्चों की शिक्षा और सरकारी योजनाओं के लाभ पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि एससी दर्जा नहीं होने के कारण कई बच्चे छात्रवृत्ति सहित विभिन्न सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।

गरीबी और बदहाली को लेकर भी ग्रामीणों ने उठाई आवाज

बैठक के दौरान समाज के लोगों ने अपनी आर्थिक परेशानियों को भी सामने रखा। ग्रामीणों के अनुसार, समाज के कई परिवार आज भी दूसरों के घरों में मजदूरी और घरेलू काम करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर होने की बात ग्रामीणों ने कही। कई परिवारों के घरों में पानी घुस जाने के कारण रहने और खाना बनाने तक में परेशानी होने का दावा किया गया।

ग्रामीणों ने कहा कि वे वर्षों से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

चुनावी वादों पर भी जनप्रतिनिधियों से नाराजगी

बैठक में ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान उनकी समस्याओं के समाधान और विकास को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद इन समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम और अपने अधिकार चाहिए।

सरकार से एससी दर्जे और मूलभूत सुविधाओं की मांग

बैठक में समाज के लोगों ने झारखंड सरकार से दंड क्षेत्र मांझी समाज को जल्द अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग की। इसके साथ ही बच्चों को शिक्षा और छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने तथा समाज के गांवों में आवास, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मुद्दा केवल सरकारी योजनाओं के लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अधिकार, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

बैठक में प्रदीप दलाई, सुभाष दिगार, मिहिर बाग, देवाशीष नमाता, मनशा दलाई, खातु दलाई, नंदलाल बाग, संभु नाथ दलाई, सुजीत सेनापति, विजय सेनापति, गोकुल नायक, गौरांग माली, भोलानाथ खमराइ, तापस चालक, स्वपन दलाई, महेंद्र धावडिआ, शंकर खामराइ, गोपाल माली, अर्जुन नायक और अजित देहुरी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।