पांकी (पलामू): जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत महुगांई गांव में महुगांई डैम की सरकारी नहर पर कथित अतिक्रमण कर मकान बनाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नहर में निर्माण होने से पानी की निकासी बाधित हो गई है, जिससे करीब 150 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित हो रही है। बुधवार को ग्रामीणों ने पलामू उपायुक्त से मिलकर नहर से अतिक्रमण हटाने और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की।

नहर पर मकान बनने से सिंचाई प्रभावित होने का आरोप

उपायुक्त को दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के गुलाबी भुइयां, पिता सूरज भुइयां, ने डैम की सरकारी नहर पर कथित रूप से अतिक्रमण कर मकान बना लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पानी की निकासी बंद हो गई है और खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

महुगांई डैम से निकलने वाली नहर के पानी से आसपास के गांवों के किसान अपनी कृषि भूमि की सिंचाई करते थे। ग्रामीणों का कहना है कि नहर में पानी का प्रवाह बाधित होने से धान की फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

डैम का फाटक खुलने पर नुकसान की आशंका

ग्रामीणों ने आवेदन में आशंका जताई है कि डैम का फाटक खोले जाने पर पानी का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में आसपास रहने वाले गरीब और दलित परिवारों के घरों में पानी घुसने या मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि नहर पर निर्माण होने के कारण नियमित साफ-सफाई में परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से समय रहते समस्या का समाधान कराने की मांग की है, ताकि किसानों की फसल और आसपास के घरों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि नहर पर कथित अतिक्रमण का विरोध करने पर गुलाबी भुइयां की ओर से पैसे और प्रभाव का धौंस दिखाया जाता है। साथ ही, ग्रामीणों को एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का बयान और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नहर की मापी और अतिक्रमण हटाने की मांग

ग्रामीणों ने उपायुक्त से पूरे मामले की जांच कराने, सरकारी नहर की जमीन की मापी कराकर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही नहर की साफ-सफाई कराकर पानी की निकासी बहाल करने का आग्रह किया गया है।

ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव और संबंधित मंत्री को भी पत्र लिखा है।

अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि समय रहते नहर की समस्या का समाधान होगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा और आसपास के परिवारों को संभावित खतरे से राहत मिलेगी।