JPSC-JSSC विवाद पर सियासत तेज: राधाकृष्ण किशोर बोले- ‘CID और स्पेशल ब्रांच बंद कर दें क्या?’ बाबूलाल मरांडी का पलटवार
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सियासी टकराव में बदलता जा रहा है। छात्रों की लगातार CBI जांच की मांग के बीच वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की जांच एजेंसियों पर भरोसा रखने की अपील की है। वहीं, उनके बयान पर नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने तीखा पलटवार करते हुए CID की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों के आंदोलन और CBI जांच की मांग के बीच राधाकृष्ण किशोर ने प्रदर्शनकारियों से राज्य की जांच एजेंसियों पर विश्वास रखने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हर मामले में CBI जांच की मांग की जाएगी तो “CID और स्पेशल ब्रांच को बंद कर दें क्या?” मंत्री के मुताबिक राज्य की जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों में जांच आगे बढ़ रही है। उन्होंने छात्रों से जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर CID जांच कर रही है और मामले में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। सरकार का तर्क है कि जब राज्य की एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं तो केवल CBI जांच की मांग करना उचित नहीं है। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि राज्य की एजेंसियों की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है। राधाकृष्ण किशोर के बयान के बाद बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर हमला बोला। मरांडी ने कहा कि किसी ने भी CID को बंद करने की मांग नहीं की है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि CID की कमान किसी ऐसे ईमानदार अधिकारी को क्यों नहीं दी जाती, जिस पर जनता को भरोसा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी जांच एजेंसी की कमान ऐसे अधिकारी के हाथ में होगी जिसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो उसकी जांच पर जनता कैसे भरोसा करेगी? बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में राज्य में ईमानदार अधिकारियों की कमी नहीं होने का दावा करते हुए सरकार को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है तो किसी ऐसे ईमानदार अधिकारी को CID की कमान दी जाए, जिसकी कार्रवाई पर कोई सवाल न उठा सके। मरांडी ने आगे आरोप लगाया कि यदि निष्पक्ष और ईमानदार तरीके से जांच हुई तो कई बड़े और प्रभावशाली चेहरे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। यही वजह है कि उनके मुताबिक सरकार CBI जांच की मांग को स्वीकार नहीं कर रही है। JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से जारी है। छात्रों की प्रमुख मांगों में CBI जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है। दूसरी ओर, सरकार राज्य की जांच एजेंसियों की कार्रवाई का हवाला देते हुए जांच पर भरोसा रखने की अपील कर रही है। परीक्षा रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर सरकार की ओर से कदम उठाए जाने के बावजूद छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। JPSC-JSSC विवाद में अब सवाल सिर्फ कथित अनियमितताओं की जांच का नहीं रह गया है, बल्कि जांच एजेंसी की विश्वसनीयता भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक ओर सरकार का कहना है कि CID और राज्य की दूसरी एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं, वहीं छात्र और विपक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार छात्रों को CBI जांच के लिए राजी कर पाएगी या आंदोलनकारी अपनी मांग पर कायम रहेंगे? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं।मंत्री ने पूछा- ‘CID और स्पेशल ब्रांच बंद कर दें क्या?’
CID जांच और गिरफ्तारियों का सरकार ने दिया हवाला
बाबूलाल मरांडी का पलटवार- ‘CID बंद नहीं, कमान ईमानदार अधिकारी को दीजिए’
‘ईमानदार जांच हुई तो बड़े चेहरे भी आएंगे गिरफ्त में’
CBI जांच पर अड़ा छात्र आंदोलन
अब मुद्दा सिर्फ परीक्षा का नहीं, जांच की विश्वसनीयता का भी














