JPSC के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते की जमानत पर फैसला सुरक्षित, ‘2 करोड़ कमीशन’ के आरोपों पर कोर्ट में हुई बहस
रांची: JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद CID की विशेष अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एल ख्यांग्ते की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि एल ख्यांग्ते के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना था कि जांच के दौरान की गई छापेमारी में भी उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताया गया। दूसरी ओर, CID ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के सामने एल ख्यांग्ते की कथित भूमिका का हवाला दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, TDPL को परीक्षा आयोजन का काम दिए जाने में एल ख्यांग्ते की भूमिका रही थी। CID का दावा है कि TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल थे और इसकी जानकारी होने के बावजूद कथित तौर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पिछली सुनवाई के दौरान CID की ओर से अदालत में केस डायरी भी पेश की गई थी। अब दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। CID ने एल ख्यांग्ते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले की जांच के दौरान उनके खिलाफ TDPL से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप सामने आया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की गई थी। पूछताछ पूरी होने के बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। हालांकि, कमीशन लेने का आरोप जांच एजेंसी का दावा है और इस संबंध में अदालत का अंतिम फैसला अभी बाकी है। JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान एल ख्यांग्ते की गिरफ्तारी की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक इस मामले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। केस में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही है। मामले में CID की जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आए अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान का भी उल्लेख किया जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी ने अपने बयान में एल ख्यांग्ते की कथित भूमिका का जिक्र किया है। CID का दावा है कि अभय तिवारी ने TDPL को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयन किए जाने में एल ख्यांग्ते की महत्वपूर्ण भूमिका होने की बात कही है। हालांकि, किसी आरोपी या गवाह के कथित बयान में लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। जमानत याचिका पर बचाव पक्ष और CID की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अदालत एल ख्यांग्ते को जमानत देगी या उन्हें जेल में ही रहना होगा? फिलहाल JPSC परीक्षा कथित अनियमितता मामले में CID की जांच जारी है और अदालत के आगामी आदेश पर पूरे मामले की दिशा को लेकर नजर बनी हुई है।CID का दावा- परीक्षा एजेंसी को काम देने में ख्यांग्ते की भूमिका
10 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी
CID ने दर्ज किया है कांड संख्या 16/2026
‘किंगपिन’ अभय तिवारी के बयान का भी हवाला
अब कोर्ट के फैसले का इंतजार















