रांची:  झारखंड में महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (JSSC) को बड़ी राहत मिली है। नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें दस्तावेज सत्यापन के दौरान अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के JSSC के फैसले को निरस्त कर दिया गया था।

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने JSSC की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई। मामले की अगली सुनवाई अब 6 अक्टूबर 2026 को होगी।

JSSC ने एकल पीठ के आदेश को दी थी चुनौती

दरअसल, महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में JSSC ने दस्तावेज सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी में त्रुटि बताते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ आकांक्षा कुमारी एवं अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने 15 मई 2026 को JSSC के उस फैसले को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत प्रार्थियों की उम्मीदवारी रद्द की गई थी।

एकल पीठ ने JSSC को संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का भी निर्देश दिया था। इसी आदेश को JSSC ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी।

JSSC की अपील पर अब 6 अक्टूबर को सुनवाई

JSSC की ओर से दाखिल अपील पर चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की। JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और जयप्रकाश ने पक्ष रखा।

सुनवाई के बाद खंडपीठ ने फिलहाल एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। ऐसे में महिला सुपरवाइजर नियुक्ति से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर अब अगली सुनवाई पर टिकी है।

444 महिला सुपरवाइजर पदों पर निकला था विज्ञापन

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से एकल पीठ के समक्ष दलील दी गई थी कि महिला सुपरवाइजर के 444 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।

अभ्यर्थियों की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि नियुक्ति के विज्ञापन और संबंधित नियुक्ति नियमावली में यह स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया था कि उम्मीदवार के पास सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी और होम साइंस में तीन वर्षीय ऑनर्स डिग्री होना अनिवार्य है।

अभ्यर्थियों ने क्या दी थी दलील?

प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई थी कि महिला सुपरवाइजर पद के लिए इन तीनों विषयों के साथ स्नातक होना जरूरी था। संबंधित अभ्यर्थियों के पास इन विषयों में अलग-अलग ऑनर्स की डिग्री नहीं थी, लेकिन उन्होंने स्नातक स्तर पर तीनों विषयों की पढ़ाई तीन वर्षों तक की थी।

इसी आधार पर अभ्यर्थियों ने अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए JSSC के उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया था।

अब खंडपीठ द्वारा एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद मामला एक बार फिर अहम मोड़ पर पहुंच गया है। 6 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय करेगा।

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