झारखंड में DGP की स्थायी नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई, 7 सितंबर को तय होगी आगे की दिशा
नई दिल्ली: झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में राज्यों में DGP की नियुक्ति प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान झारखंड का मामला भी सामने आया। अब इस मामले में 7 सितंबर 2026 को विस्तृत सुनवाई प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे मामले की सुनवाई का केंद्र राज्यों में नियमित DGP की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन है। अदालत पहले ही झारखंड और उत्तर प्रदेश से सवाल कर चुकी है कि प्रकाश सिंह फैसले के अनुरूप DGP नियुक्ति का प्रस्ताव UPSC को क्यों नहीं भेजा गया। झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति का मुद्दा लंबे समय से न्यायिक निगरानी में है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, 18 अगस्त 2026 की कार्यवाही में UPSC की ओर से स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इसमें बताया गया था कि झारखंड में कार्यवाहक DGP है और नियमित DGP की नियुक्ति के लिए UPSC को प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। मामले से संबंधित पेपरबुक न्याय मित्र (Amicus Curiae) को सौंपे जाने और विस्तृत नोट तैयार करने की प्रक्रिया भी दर्ज है। इसके बाद अब मामले में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के प्रकाश सिंह फैसले में पुलिस सुधारों को लेकर DGP की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया तय की थी। बाद की कार्यवाहियों में कोर्ट ने राज्यों और UPSC को इस व्यवस्था के अनुरूप प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया है। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि समान परिस्थितियों वाले राज्यों में DGP नियुक्ति को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए। इसी व्यवस्था के तहत नियमित DGP की नियुक्ति प्रक्रिया में UPSC की भूमिका महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2026 के आदेश में झारखंड और उत्तर प्रदेश को यह बताने के लिए कहा था कि प्रकाश सिंह फैसले के अनुरूप DGP नियुक्ति का प्रस्ताव UPSC को क्यों नहीं भेजा गया। यही वजह है कि अब झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति का मामला सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भी है। अब 7 सितंबर की प्रस्तावित सुनवाई पर सबकी नजर है। इस दौरान अदालत के समक्ष झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया, UPSC से जुड़े पहलुओं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुपालन की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में 7 सितंबर की सुनवाई झारखंड पुलिस के शीर्ष पद पर स्थायी नियुक्ति की दिशा में आगे का रास्ता साफ करने वाली मानी जा रही है। झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। विपक्ष राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यवाहक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता रहा है, जबकि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया और राज्य की नियमावली को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।झारखंड में नियमित DGP को लेकर क्या है मामला?
2006 के प्रकाश सिंह फैसले में क्या तय हुआ था?
झारखंड से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था जवाब
7 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
DGP नियुक्ति को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी















