पतरातू: रामगढ़ जिले के पतरातू पीटीपीएस स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सेवाकेंद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक और धार्मिक विषयों पर विशेष चर्चा की गई।

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी रोशनी, गीता देवी और बीके रामदेव ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर विशेष व्याख्यान दिया। वक्ताओं ने श्रीकृष्ण के जीवन, उनके गुणों और उनके आदर्श स्वरूप को लेकर लोगों को जानकारी दी।

पतरातू सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी रोशनी बहन ने कहा कि भारत में हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हर मां अपने बच्चे को नयनों का तारा और दिल का दुलारा मानती है, लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चे को श्रीकृष्ण के स्वरूप में सजाकर उसके सिर पर मोर-मुकुट और हाथ में मुरली दी जाती है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का स्वरूप ऐसा है, जो लोगों के मन को अपनी ओर आकर्षित करता है। सुंदरता आज भी कई लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन श्रीकृष्ण को सर्वांग सुंदर, सर्वगुण संपन्न और सोलह कला संपूर्ण माना गया है। इसी अनुपम सौंदर्य और गुणों के कारण श्रीकृष्ण की मूर्ति भी लोगों के चित्त को आकर्षित करती है।

ब्रह्माकुमारी रोशनी ने कहा कि वर्तमान कलियुगी वातावरण में मनुष्य के जीवन में क्रोध, मोह, अहंकार और लोभ जैसे विकार देखने को मिलते हैं। इसके विपरीत श्रीकृष्ण को ऐसे आदर्श स्वरूप के रूप में देखा जाता है, जिनकी दृष्टि और वृत्ति विकारों से मुक्त थी।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण नष्टोमोहा, निरहंकारी और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में आदर्श माने जाते हैं। उन्हें संपूर्ण निर्विकारी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि उनके व्यक्तित्व में किसी प्रकार का विकार नहीं था।

उन्होंने कहा कि जिस तन की सुंदर मूर्ति बनाकर मंदिर में स्थापित की जाती है, उसका मन भी मंदिर के समान पवित्र माना गया है। श्रीकृष्ण केवल तन से देवता नहीं थे, बल्कि उनके मन में भी देवत्व था।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन और उनके गुणों से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। जन्माष्टमी महोत्सव के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों, पवित्रता और सद्गुणों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।