नई दिल्ली: दिल्ली में हो रहे BRICS Summit के बीच भारत और रूस के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़े प्रोजेक्ट पर नजरें टिक गई हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बातचीत में International North-South Transport Corridor (INSTC) का मुद्दा अहम हो सकता है।

यह करीब 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क भारत को रूस और मध्य एशिया से जोड़ने की क्षमता रखता है। इसका उद्देश्य समुद्र, रेल और सड़क के संयुक्त नेटवर्क के जरिए माल ढुलाई को तेज और अपेक्षाकृत कम लागत वाला बनाना है।

क्या है पुतिन का भारत-रूस कनेक्टिविटी प्लान?

रूस लंबे समय से भारत और रूस के बीच वैकल्पिक व्यापार मार्गों को मजबूत करने की दिशा में INSTC को महत्वपूर्ण मानता रहा है। अब रूस की ओर से भारत और हिंद महासागर क्षेत्र तक बेहतर रेल कनेक्टिविटी की संभावनाओं पर जोर दिए जाने से इस कॉरिडोर को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है।

रूसी उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने हाल में एक इंटरव्यू में भारत और हिंद महासागर तक सीधे रेलवे लिंक की संभावनाओं का उल्लेख किया था। इसमें तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़े संभावित मार्गों की बात सामने आई थी।

हालांकि, इन सभी मार्गों की व्यवहारिकता और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति अलग-अलग है। ऐसे में INSTC को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए कई स्तरों पर बुनियादी ढांचे और कूटनीतिक समन्वय की जरूरत होगी।

7,200 किलोमीटर लंबा INSTC क्या है?

International North-South Transport Corridor यानी INSTC भारत, रूस और ईरान की पहल से जुड़ा एक मल्टीमॉडल परिवहन कॉरिडोर है। इसके लिए तीनों देशों ने 2002 में समझौता किया था।

इस नेटवर्क में रेलवे, सड़क और समुद्री परिवहन को जोड़ा जाता है। इसका मकसद भारत और रूस के बीच पारंपरिक समुद्री रूट की तुलना में एक वैकल्पिक और अधिक प्रभावी व्यापार मार्ग तैयार करना है।

कैसे काम करता है INSTC?

प्रस्तावित नेटवर्क में भारत के पश्चिमी तट से भेजे गए सामान को समुद्री रास्ते से ईरान के बंदर अब्बास या चाबहार जैसे बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके बाद रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए सामान को ईरान, अजरबैजान और आगे रूस तक ले जाने की व्यवस्था की जाती है। इस तरह एक ही कॉरिडोर में समुद्री, रेल और सड़क परिवहन का इस्तेमाल होता है।

भारत-रूस व्यापार में क्यों महत्वपूर्ण है INSTC?

INSTC के पूरी तरह प्रभावी होने पर भारत और रूस के बीच माल ढुलाई के समय और लागत में कमी आने की संभावना है। इससे दोनों देशों के कारोबारियों के लिए व्यापार आसान हो सकता है।

इसका फायदा केवल भारत और रूस तक सीमित नहीं रहेगा। कॉरिडोर के जरिए भारत की पहुंच ईरान, अजरबैजान और मध्य एशिया के बाजारों तक भी बेहतर हो सकती है।

भारत के लिए कैसे गेमचेंजर हो सकता है यह कॉरिडोर?

1. रूस के साथ व्यापार को मिलेगी रफ्तार

भारत और रूस के बीच ऊर्जा, खाद, मशीनरी, रक्षा और दूसरे क्षेत्रों में कारोबार होता है। बेहतर लॉजिस्टिक नेटवर्क से माल की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है।

2. मध्य एशिया तक पहुंच मजबूत होगी

कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों के साथ भारत की व्यापारिक और रणनीतिक भागीदारी बढ़ाने में बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

3. भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार

दवाएं, कपड़ा, चाय, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी और दूसरे भारतीय उत्पाद रूस तथा मध्य एशिया के बाजारों तक अपेक्षाकृत तेज तरीके से पहुंचाए जा सकते हैं।

4. समुद्री मार्गों पर निर्भरता घट सकती है

दुनिया के कई प्रमुख समुद्री मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में वैकल्पिक भूमि आधारित व्यापार मार्ग भारत और रूस दोनों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं।

होर्मुज और सुएज संकट के बीच क्यों बढ़ी INSTC की अहमियत?

वैश्विक स्तर पर समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर बढ़ते तनाव ने वैकल्पिक कनेक्टिविटी की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में तनाव या किसी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

ऐसे माहौल में भारत और रूस के लिए INSTC जैसे वैकल्पिक कॉरिडोर भविष्य में व्यापार को अधिक लचीला बनाने में मदद कर सकते हैं।

रास्ते में अभी भी कई बड़ी चुनौतियां

INSTC का नेटवर्क बेहद महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसे पूरी क्षमता से चलाने में कई व्यावहारिक चुनौतियां मौजूद हैं।

अधूरा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर

ईरान के रश्त-अस्तारा रेल सेक्शन जैसे कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों का विकास इस कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने के लिए अहम माना जाता है।

अलग-अलग रेलवे गेज

कॉरिडोर से जुड़े देशों में रेलवे ट्रैक की चौड़ाई अलग-अलग होने के कारण सीमा पार माल ढुलाई में अतिरिक्त प्रक्रिया और समय लग सकता है।

कस्टम और सीमा शुल्क की प्रक्रिया

कई देशों से होकर गुजरने वाले कॉरिडोर में अलग-अलग कस्टम नियम, दस्तावेज और शुल्क व्यवस्था व्यापार को प्रभावित कर सकती है। इन्हें आसान और अधिक समन्वित बनाना बड़ी चुनौती होगी।

PM मोदी और पुतिन की बातचीत पर टिकी नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

INSTC को लेकर रूस की प्राथमिकता इसे अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में हो सकती है। पूर्वी और पश्चिमी कनेक्टिविटी रूट को मजबूत करने से भारत, ईरान, रूस और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक नेटवर्क को नई गति मिल सकती है।

अगर इस दिशा में ठोस प्रगति होती है तो आने वाले वर्षों में भारत-रूस व्यापार के लिए यह कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता बन सकता है।

राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार के बाद अब कनेक्टिविटी पर जोर

रूस और BRICS देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में भुगतान व्यवस्था के साथ-साथ माल की तेज और सुरक्षित आवाजाही के लिए मजबूत ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का महत्व और बढ़ जाता है।

भारत और रूस के बीच व्यापार को बढ़ाने की दिशा में पेमेंट सिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, दोनों को मजबूत करना आने वाले समय की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।


  • भारत और रूस के बीच INSTC को लेकर चर्चा तेज हुई है।
  • INSTC करीब 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है।
  • इसमें समुद्री मार्ग के साथ रेल और सड़क नेटवर्क को जोड़ा गया है।
  • भारत के लिए रूस और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच मजबूत करने का मौका है।
  • रूस के लिए हिंद महासागर और भारतीय बाजार तक बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है।
  • रश्त-अस्तारा रेल सेक्शन और अलग-अलग रेलवे गेज जैसी चुनौतियां अभी मौजूद हैं।
  • BRICS Summit के दौरान मोदी-पुतिन बातचीत में कनेक्टिविटी और व्यापार अहम मुद्दे हो सकते हैं।

निष्कर्ष

भारत और रूस के बीच INSTC केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के व्यापार और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला नेटवर्क बन सकता है। अगर इंफ्रास्ट्रक्चर, कस्टम और सीमा पार कनेक्टिविटी की चुनौतियों को दूर किया जाता है, तो मुंबई से मॉस्को तक माल पहुंचाने का यह वैकल्पिक रास्ता भारत-रूस व्यापार के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।