दुमका में वन विभाग के पौधरोपण कार्य में बाल श्रम का आरोप मजदूरी में कटौती का दावा
झारखंड
की उप-राजधानी दुमका में वन विभाग द्वारा संचालित पौधरोपण कार्य को लेकर गंभीर
सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वृक्षारोपण अभियान के तहत चल रहे कार्य में नियमों की
अनदेखी करते हुए नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है। साथ ही मजदूरों को
निर्धारित दर से कम भुगतान किए जाने का भी दावा किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कार्यस्थल पर योजना से संबंधित सूचना
बोर्ड नहीं लगाया गया है जिससे
कार्य की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई नाबालिग बच्चे
पौधरोपण कार्य में लगे हुए दिखाई दिए जो
श्रम कानूनों के उल्लंघन की आशंका पैदा करता है। कार्य में लगे कुछ लोगों का कहना है कि
उन्हें प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी दी जा रही है।
वहीं वन विभाग के एक अधिकारी (वनपाल) ने कथित
तौर पर बताया कि सरकारी निर्धारित दर 400 रुपये प्रतिदिन है। इस अंतर को लेकर मजदूरों ने भुगतान में
कटौती का आरोप लगाया है। हालांकि इस
संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने के
आरोप पर वनपाल ने कहा कि बच्चे संभवतः किसी मजदूर के बदले कार्यस्थल पर आए होंगे।
उन्होंने सीधे तौर पर विभाग द्वारा बाल श्रम कराए जाने के आरोप से इनकार किया। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय
लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। उनका
कहना है कि यदि बाल श्रम और मजदूरी में अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं तो
जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।मजदूरी में कटौती का
आरोप
बाल श्रम के आरोप पर
विभाग का जवाब
जांच की मांग














