देवघर:  राजकीय श्रावणी मेला के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम में इन दिनों आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु सुल्तानगंज से करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर देवघर पहुंच रहे हैं। कोई पारंपरिक कांवड़ लेकर बाबा धाम पहुंच रहा है तो कोई अपनी अनोखी सजावट और स्वरूप से श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहा है।

बाबा बैद्यनाथ के प्रति कांवरियों की अटूट आस्था और भक्ति का ऐसा ही अनोखा रंग इन दिनों देवघर की सड़कों पर देखने को मिल रहा है।

हावड़ा के कांवरियों का अनोखा कांवड़ बना आकर्षण

श्रावणी मेला के दौरान हावड़ा से बाबा धाम पहुंचे कांवरियों का एक अनोखा कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कांवड़ की आकर्षक सजावट और अलग स्वरूप लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

कांवरियों का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा ही उन्हें इतनी लंबी और कठिन यात्रा पूरी करने की शक्ति देती है। पैरों में थकान और रास्ते की मुश्किलों के बावजूद बाबा के दर्शन की लालसा उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रहती है।

थकान नहीं, चेहरे पर दिख रही भक्ति

सुल्तानगंज से देवघर तक की करीब 105 किलोमीटर की यात्रा आसान नहीं होती। तपती सड़क, लंबा रास्ता और लगातार पैदल चलने के बावजूद बाबा धाम पहुंचते ही कांवरियों के चेहरों पर थकान के बजाय उत्साह, उमंग और भक्ति का भाव साफ नजर आता है।

कंधे पर कांवड़ और जुबां पर बाबा का नाम लिए श्रद्धालु लगातार देवघर की ओर बढ़ रहे हैं। जैसे ही कांवरिया बाबा धाम की सीमा में प्रवेश करते हैं, उनकी आस्था और उत्साह देखते ही बनता है।

‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ से गूंज रहा बाबा धाम

श्रावणी मेला के दौरान पूरा देवघर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज रहा है। कांवरियों के जत्थे लगातार बाबा मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं।

रास्ते में कहीं भक्ति गीत सुनाई दे रहे हैं तो कहीं कांवरियों के जयकारे माहौल को शिवमय बना रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों से आए श्रद्धालु अपनी-अपनी परंपराओं और अनोखे कांवड़ों के साथ बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं।

आस्था के महासैलाब में दिख रही देश की विविधता

बाबा धाम की श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि देश की अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं के मिलन का भी बड़ा अवसर है। अलग-अलग राज्यों से पहुंचे कांवरियों की वेशभूषा, कांवड़ सजाने का तरीका और भक्ति की शैली इस मेले को और खास बना रही है।

किसी के कांवड़ पर आकर्षक सजावट है तो किसी ने उसे धार्मिक प्रतीकों से सजाया है। यही विविधता श्रावणी मेला की खूबसूरती को और बढ़ा रही है।

अनोखे कांवड़, लेकिन मंजिल एक

कांवड़ चाहे जितना अलग हो, श्रद्धालुओं की मंजिल एक ही है, बाबा बैद्यनाथ का दरबार।

कठिन यात्रा, लंबा रास्ता और शारीरिक थकान के बावजूद कांवरियों की आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही। बाबा के जयकारों के साथ आगे बढ़ते कांवरियों का यह उत्साह देवघर की श्रावणी मेला को एक अलग ही रंग दे रहा है।