गढ़वा  के मसरा गांव में आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका चयन प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पीपल पेड़ के नीचे आयोजित ग्रामीण बैठक में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) पर मनमानी और पक्षपातपूर्ण चयन का आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि 19 जून को आयोजित आमसभा में सेविका पद के लिए 7 और सहायिका पद के लिए 2 आवेदन प्राप्त हुए थे। लेकिन आरोप है कि चयन प्रक्रिया में उच्च शैक्षणिक योग्यता (बीए और एमए) रखने वाले अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर इंटर पास उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

बैठक में मौजूद लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि चयन के दौरान अभ्यर्थियों की योग्यता  अंक और चयन के आधार को सार्वजनिक नहीं किया गया  जबकि बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि चयनित अभ्यर्थी के परिवार में पहले से ही अन्य सरकारी पदों पर लोग कार्यरत हैं  जिससे एक ही परिवार को बार-बार लाभ मिलने का आरोप लग रहा है।

वहीं इस मामले पर CDPO बिंदु ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि चयन के समय सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी ग्रामीणों के समक्ष प्रस्तुत की गई थी।

CDPO ने यह भी कहा कि जिन अभ्यर्थियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं  उनकी उम्र निर्धारित मानकों से अधिक होने के कारण उनका चयन संभव नहीं था। उन्होंने आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि कुछ लोग गलत जानकारी फैलाकर विवाद पैदा कर रहे हैं।

फिलहाल ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच कर चयन प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा पारदर्शी तरीके से चयन कराने की मांग की है। यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।