रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और नौकरियां बेचे जाने के आरोपों को लेकर छात्र आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी मामले की सीबीआई जांच समेत विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इसी बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया है।

बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को कहा कि सरकार छात्रों की मांगों पर फैसला लेने में लगातार देरी कर रही है और आंदोलन के दबाव में ही वार्ता की पहल कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई छात्रों के दबाव का परिणाम है।

‘विधानसभा घेराव की घोषणा के बाद बनाई कमेटी’

मरांडी के मुताबिक, छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार ने जल्दबाजी में चार मंत्रियों की एक कमेटी गठित कर दी। उनका आरोप है कि कमेटी बनाए जाने के बाद सरकार ने मामले पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।

उन्होंने कहा कि इसके बाद जब छात्रों की ओर से 15 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया गया, तब सरकार ने 17 अगस्त को छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया।

‘छह दिनों तक क्यों चुप रही सरकार?’

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों की मांगों को लेकर गंभीर थी, तो छह दिनों तक वार्ता की पहल क्यों नहीं की गई।

मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार हर बार छात्रों के आंदोलन के दबाव में ही सक्रिय होती है। उन्होंने कहा कि अब झारखंड के छात्र केवल आश्वासन या किसी कथित झांसे से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों की मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि लंबे समय से चल रहे आंदोलन का स्थायी समाधान निकल सके।

CBI जांच पर अब भी गतिरोध

JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है।

राज्य सरकार की ओर से कुछ मांगों पर सहमति जताने की बात सामने आई है। वहीं, सीबीआई जांच को लेकर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच अभी भी मतभेद बना हुआ है।

सरकार की ओर से राज्य की जांच एजेंसी CID के जरिए विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की बात कही गई है। आंदोलनकारी छात्र हालांकि केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग पर कायम हैं।

आज की वार्ता पर टिकी नजर

छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने 17 अगस्त को अभ्यर्थियों के साथ वार्ता का प्रस्ताव दिया है। ऐसे में आज होने वाली बातचीत को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक ओर सरकार बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी छात्र अपनी प्रमुख मांगों, खासकर सीबीआई जांच, पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।

अब देखना होगा कि सरकार और छात्रों के बीच होने वाली वार्ता में क्या कोई ठोस सहमति बनती है या JPSC-JSSC विवाद को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहता है।