हजारीबाग में फीस की लूट पर सवाल
हजारीबाग में इन
दिनों बिजली और पानी की समस्या को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। विभिन्न राजनीतिक
दल धरना प्रदर्शन ज्ञापन और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए
जनता की समस्याओं को उठा रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल अभिभावकों के बीच
चर्चा का विषय बन गया है क्या बच्चों की शिक्षा और निजी स्कूलों
की मनमानी नेताओं की प्राथमिकता में शामिल नहीं है नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही निजी
स्कूलों द्वारा री एडमिशन फीस डेवलपमेंट फीस, स्मार्ट क्लास फीस
किताब कॉपी और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों
से भारी रकम वसूले जाने के आरोप लग रहे हैं।मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि
बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और कई परिवार फीस भरने के लिए
कर्ज लेने को मजबूर हैं।लोगों का कहना है कि बिजली और पानी के मुद्दे पर सड़क पर
उतरने वाले जनप्रतिनिधि कभी निजी स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ आवाज उठाते नजर
नहीं आते।अभिभावकों का सवाल है कि यदि शिक्षा को सेवा माना जाता है तो फिर स्कूलों में
हर साल री एडमिशन के नाम पर मोटी रकम क्यों वसूली
जा रही है शहर
में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि शिक्षा व्यवस्था और फीस नियंत्रण जैसे मुद्दों पर
राजनीतिक दलों की चुप्पी आखिर क्यों है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का भविष्य
भी उतना ही बड़ा मुद्दा है जितना बिजली और पानी।लोगों का मानना है कि यदि समय रहते
इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़े
जनआंदोलन का रूप ले सकता है।














