3,500 करोड़ की 5 रक्षा परियोजनाओं का शिलान्यास, राजनाथ सिंह बोले- अब किसी पर निर्भर नहीं रहेगा भारत
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत की सोच अब बदलनी चाहिए। अब यह नहीं सोचना चाहिए कि भारत दुनिया से क्या खरीदेगा, बल्कि यह सोचना चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। रविवार को करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण रक्षा और औद्योगिक परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता को देखा है। इससे यह साबित हुआ कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं, बल्कि देश की युद्धक क्षमता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। इन परियोजनाओं में पश्चिम बंगाल स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं शामिल हैं— इसके अलावा यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं का भी शिलान्यास किया गया। इनमें 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट शामिल हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी गुणवत्ता वाला रक्षा उत्पादन तैयार करना होना चाहिए, जिस पर दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी हो कि वैश्विक बाजार भारत को चुने और डिलीवरी क्षमता ऐसी हो कि ग्राहक बार-बार ऑर्डर दें। उन्होंने कहा कि GRSE की बढ़ती क्षमता से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पकड़ मजबूत होगी। भारतीय कंपनियों को अब वैश्विक बाजार में अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ना होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों की मरम्मत और ओवरहॉल का बड़ा केंद्र बनता है, तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ हजारों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इन पांच परियोजनाओं से रक्षा उत्पादन के अलावा MSME, संबद्ध उद्योगों और रोजगार क्षेत्र को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएं आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड के लक्ष्य को मजबूत करेंगी।GRSE और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई परियोजनाएं
‘मेक इन इंडिया से मेक फॉर द वर्ल्ड’ की ओर भारत














