पुरुलिया में अंतरराज्यीय गो-तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार; इनोवा, स्कॉर्पियो समेत 6 वाहन जब्त
पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के
पुरुलिया जिले में सक्रिय अंतरराज्यीय मवेशी चोरी और कथित गो-तस्करी गिरोह का
पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
साथ ही चार इनोवा, एक
स्कॉर्पियो और एक बोलेरो समेत कुल छह वाहन जब्त किए गए हैं। पुलिस ने चोरी किए गए
कई मवेशियों को भी बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में गिरोह के तार झारखंड से
जुड़े होने की बात सामने आई है। गुरुवार को पुरुलिया
पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक कुमार सानी राज ने
मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने से झारखंड की सीमा से सटे
बलरामपुर, बराबाजार, झालदा, आड़शा और काशीपुर थाना क्षेत्रों में
लगातार मवेशी चोरी की घटनाएं हो रही थीं। इन घटनाओं को अंजाम देने के लिए आरोपी
महंगी चारपहिया गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के अनुसार,
गिरोह के सदस्य इनोवा, स्कॉर्पियो और बोलेरो जैसी गाड़ियों की
पिछली सीटें हटा देते थे। इसके बाद सड़क किनारे या लोगों के घरों से मवेशियों को
कथित तौर पर चोरी कर गाड़ियों में भरते और तेजी से झारखंड की ओर निकल जाते थे। पुलिस का मानना है कि
गाड़ियों में बदलाव करने से आरोपियों को कम समय में मवेशियों की ढुलाई करने में
मदद मिलती थी। इस तरीके से वे पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश करते थे। लगातार हो रही चोरी
की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जिले के विभिन्न थानों में पांच मामले
दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें गिरोह के सात कथित सदस्यों को
गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने गिरफ्तार
आरोपियों में दो कथित मुख्य सदस्यों की पहचान की है। इनमें पुरुलिया का स्थानीय
सूचना देने वाला बताया गया मोहम्मद अनवर और झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के
कपाली क्षेत्र का निवासी मोहम्मद कबीर शामिल है। पुलिस के मुताबिक,
गिरफ्तार आरोपियों में अधिकांश झारखंड
के रहने वाले हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह के सदस्य
किस तरह मवेशियों की रेकी करते थे और चोरी के बाद उन्हें कहां पहुंचाते थे। छापेमारी के दौरान
जब्त किए गए छह वाहनों की जांच में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस के
अनुसार, कुछ वाहनों पर फर्जी
नंबर प्लेट लगी हुई थी, जबकि
कुछ गाड़ियों पर नंबर प्लेट मौजूद नहीं थी। पुलिस को आशंका है कि
वाहनों की वास्तविक पहचान छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए ऐसा किया जाता
था। जब्त वाहनों की जांच के साथ ही पुलिस अन्य साक्ष्य भी जुटा रही है। पुलिस अधीक्षक कुमार
सानी राज ने बताया कि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए मवेशियों को झारखंड में किन
स्थानों पर पहुंचाया जाता था और इस कथित अवैध कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल
हैं। फिलहाल पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े तथ्यों, जब्त वाहनों और बरामद मवेशियों के आधार पर मामले की आगे की
जांच कर रही है।गाड़ियों
की पिछली सीटें हटाकर करते थे मवेशियों की ढुलाई
दो
कथित मुख्य आरोपियों की पहचान
फर्जी
नंबर प्लेट से पहचान छिपाने की कोशिश
झारखंड
में कहां पहुंचाए जाते थे चोरी के मवेशी?















