राज्यसभा में जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस, CPI(M) कार्यालय में पुलिस कार्रवाई पर हंगामा
नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के आठवें दिन राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सीपीआई (एम) कार्यालय में कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया। वहीं भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। राज्यसभा में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में पुलिस और एजेंसियों का प्रवेश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए चिंताजनक हैं और पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही विपक्ष ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग दोहराई। खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि पुलिस ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। नड्डा ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी कई बार गिरफ्तार किया गया था और उस दौर की परिस्थितियां कहीं अधिक गंभीर थीं। दरअसल, सीपीआई (एम) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारी पार्टी कार्यालय पहुंचे और एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। उनका दावा है कि संबंधित अधिकारी वर्दी में नहीं थे। उन्होंने इस पूरे मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री से संसद में बयान देने की मांग की। इधर, सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद डॉ. वी. सिवदासन ने नियम 267 के तहत स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। उन्होंने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और सीपीआई (एम) कार्यालय में पुलिस के प्रवेश के मुद्दे को सदन में उठाने की मांग की। साथ ही उन्होंने एनटीए से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की भी मांग की। संसद में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जबकि विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई और छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों पर सरकार से जवाब मांगता रहा।















