धनबाद: कतरास थाना क्षेत्र अंतर्गत मौजा भटमुरना की 24 डिसमिल जमीन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक पक्ष ने कथित कब्जे की कोशिश और मुआवजा मामले में अनियमितता के आरोप लगाए हैं, जबकि दूसरे पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए पूरी जमीन पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया है।

12-12 डिसमिल हिस्से का दावा

रामेश्वर हजारी के वंशजों ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि मौजा भटमुरना के पुराना खाता संख्या-12, नया खाता संख्या-23, प्लॉट संख्या-11 और 12 की कुल 24 डिसमिल जमीन रामेश्वर हजारी और मुरलीधर हजारी की संयुक्त संपत्ति थी। उनके मुताबिक दोनों पक्षों का 12-12 डिसमिल हिस्सा है।

रामेश्वर हजारी के वंशजों का कहना है कि वे अपने हिस्से की जमीन पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जेसीबी से कार्य करा रहे थे। इसी दौरान मुरलीधर हजारी के वंशजों ने काम में बाधा डालते हुए जमीन पर अपना दावा जताया और कतरास थाना में आवेदन देकर काम रुकवा दिया।

मुआवजा राशि में अनियमितता का भी आरोप

रामेश्वर हजारी के वंशजों ने सड़क चौड़ीकरण के दौरान कथित तौर पर दूसरे की जमीन को अपनी बताकर मुआवजा लेने का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि इस मामले को लेकर उपायुक्त से शिकायत की गई थी और शिकायत के बाद कथित रूप से मुआवजा राशि का एक हिस्सा भू-अर्जन विभाग में वापस जमा कराया जा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

दूसरे पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, मुरलीधर हजारी के वंशज रोशन हजारी ने प्रेस वार्ता में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। उनका दावा है कि विवादित 24 डिसमिल जमीन उनके पूर्वज मुरलीधर हजारी की है और वर्तमान में उस पर मालिकाना हक उनके परिवार का है।

रोशन हजारी के मुताबिक उनके पास जमीन से संबंधित आवश्यक राजस्व एवं स्वामित्व के दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

प्रशासनिक जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल भटमुरना की 24 डिसमिल जमीन को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम हैं। एक पक्ष कथित कब्जे और मुआवजा अनियमितता के आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है।

ऐसे में जमीन के वास्तविक मालिकाना हक और लगाए गए आरोपों की सच्चाई राजस्व अभिलेखों, दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।