अंकुरित आलू की खिचड़ी से बच्चों की सेहत पर सवाल, आंगनबाड़ी केंद्रों की पोषण व्यवस्था कटघरे में
सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड में आंगनबाड़ी
केंद्रों की पोषण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। बाना आंगनबाड़ी केंद्र में
बच्चों के लिए तैयार की जा रही खिचड़ी में अंकुरित आलू इस्तेमाल किए जाने की बात
सामने आई है। वहीं, खिचड़ी
में सब्जी नहीं होने और दाल की मात्रा बेहद कम होने की शिकायत भी सामने आई है।
दूसरी ओर छेड़िया आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को बिना घी का हलवा दिए जाने का आरोप
लगाया गया है। बाना पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की
रसोई में रखे आलू पूरी तरह अंकुरित पाए गए। आरोप है कि इन्हीं आलू का इस्तेमाल
बच्चों के लिए तैयार की जाने वाली खिचड़ी में किया जा रहा था। खिचड़ी में सोयाबीन
तो मौजूद था, लेकिन सब्जी नहीं
दिखाई दी और दाल की मात्रा भी काफी कम बताई गई। बच्चों के लिए निर्धारित पोषण मानकों को
लेकर सामने आई इस स्थिति ने आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और भोजन की गुणवत्ता पर
सवाल खड़े कर दिए हैं। बाना आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 26
बच्चों के पंजीकृत होने की जानकारी है।
हालांकि, अटेंडेंस रजिस्टर में
केवल 12 बच्चों की उपस्थिति
दर्ज मिली। ऐसे में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति और पोषण आहार के वितरण से जुड़े
रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी प्रखंड के छेड़िया आंगनबाड़ी केंद्र
में बच्चों को बिना घी का हलवा दिए जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि पोषण
आहार में निर्धारित सामग्री और बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन में अंतर है। इस
शिकायत ने भी आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अंकुरित आलू के इस्तेमाल को लेकर राजनगर
के चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि ऐसे आलू के सेवन से पेट संबंधी परेशानी हो सकती
है। अधिक अंकुरित आलू में बनने वाले कुछ हानिकारक रसायन स्वास्थ्य के लिए जोखिम
पैदा कर सकते हैं। छोटे बच्चों के भोजन में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर
विशेष सावधानी जरूरी है। मामले पर सीडीपीओ ने कहा कि आंगनबाड़ी
केंद्रों की बैठकों में खिचड़ी में सब्जी मिलाने का निर्देश लगातार दिया जाता है।
यदि इसके बावजूद बच्चों को दी जाने वाली खिचड़ी में सब्जी नहीं मिल रही है,
तो यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों को
शो-कॉज किया जाएगा। जवाब मिलने के बाद मामले में नियमानुसार उचित कार्रवाई की
जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को मिलने
वाले पोषण आहार की गुणवत्ता सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऐसे में अंकुरित आलू
के इस्तेमाल, खिचड़ी में सब्जी और
दाल की कमी तथा बिना घी का हलवा दिए जाने जैसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब
निगाहें विभागीय जांच और प्रस्तावित कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि जांच
में आरोप कितने सही पाए जाते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभाग की ओर से क्या
कदम उठाया जाता है।बाना
केंद्र की रसोई में मिले अंकुरित आलू
26 बच्चे
पंजीकृत, 12 की उपस्थिति
छेड़िया
केंद्र में बिना घी का हलवा देने का आरोप
चिकित्सा
पदाधिकारी ने अंकुरित आलू को लेकर दी जानकारी
सीडीपीओ
ने कहा- सब्जी नहीं मिलना जांच का विषय
जांच
के बाद कार्रवाई का इंतजार














