साहिबगंज MTC की अनोखी पहल: कुपोषित बच्चों की माताओं को मेहंदी और मेकअप का प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
साहिबगंज: साहिबगंज सदर अस्पताल स्थित मातृ-शिशु केंद्र यानी MTC में माताओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। यहां कुपोषित बच्चों का इलाज तो किया ही जा रहा है, साथ ही उनके साथ रहने वाली माताओं को मेहंदी लगाने, मेकअप करने और दूसरे छोटे-मोटे कामों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मकसद है कि बच्चों के स्वस्थ होने के साथ उनकी माताएं भी स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ सकें। देखिए, साहिबगंज से यह खास रिपोर्ट। साहिबगंज: कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी माताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में साहिबगंज सदर अस्पताल के मातृ-शिशु केंद्र में एक नई पहल शुरू की गई है। यहां संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के उपचार के दौरान उनके साथ रहने वाली माताओं को स्वरोजगार से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दरअसल, कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इस दौरान उनकी माताओं को भी करीब 15 से 20 दिनों तक बच्चों के साथ रहना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग ने इसी अवधि का उपयोग करते हुए माताओं को ऐसे हुनर सिखाने की पहल की है, जिनसे वे घर लौटने के बाद कमाई का साधन विकसित कर सकें। मेहंदी और मेकअप का दिया जा रहा प्रशिक्षण इस पहल के तहत माताओं को मेहंदी लगाने, शादी-विवाह और अन्य विशेष अवसरों पर मेकअप करने सहित छोटे-मोटे स्वरोजगार से जुड़े कामों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मेहंदी और मेकअप जैसे कामों की मांग शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। ऐसे में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं अपने गांव या आसपास के इलाके में इन सेवाओं के जरिए आमदनी कर सकती हैं। इलाज के साथ आत्मनिर्भरता पर भी जोर इस पहल को लेकर डॉ. महमूद ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी 15 से 20 दिनों तक रहना पड़ता है। सिविल सर्जन के निर्देश पर यह मुहिम शुरू की गई है, ताकि इस दौरान माताएं कुछ नया सीख सकें और केंद्र से छुट्टी मिलने के बाद अपने क्षेत्र में स्वरोजगार का साधन विकसित कर सकें। इससे उन्हें अपने बच्चों की देखभाल करने में भी मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, साहिबगंज के पोषण पुनर्वास केंद्र की यह पहल बच्चों के उपचार के साथ उनकी माताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश है। यदि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं इन हुनरों को रोजगार में बदल पाती हैं, तो यह पहल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मददगार साबित हो सकती है।















