JSSC में CID जांच पर उठे सवाल, ‘सिर्फ खानापूर्ति’ का आरोप; चेयरमैन प्रशांत कुमार से पूछताछ की मांग
रांची: झारखंड में JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही CID जांच के बीच अब जांच की निष्पक्षता और दायरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक बयान में आरोप लगाया गया है कि JSSC में CID की जांच महज दिखावा और आईवॉश बनकर रह गई है और कार्रवाई केवल कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ तक सीमित है। बयान में JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ का जिक्र करते हुए सवाल उठाया गया है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच हो रही है, तो आयोग के शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों से भी समान रूप से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है। बयान में खास तौर पर प्रशांत कुमार, जो 22 फरवरी 2024 से JSSC के अध्यक्ष पद पर हैं, का जिक्र किया गया है। सवाल उठाया गया है कि CID की जांच में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है। आरोप लगाने वाले पक्ष ने कहा कि यदि जांच का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की पूरी सच्चाई सामने लाना है, तो जांच एजेंसी को किसी पद या हैसियत के आधार पर किसी अधिकारी को जांच के दायरे से बाहर नहीं रखना चाहिए। हालांकि, प्रशांत कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि CID ने उन्हें जांच के दायरे में लिया है या नहीं। बयान में CID से मांग की गई है कि जांच को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या कथित तौर पर जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि यदि किसी बड़े अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। कहा गया कि छात्रों का भरोसा तभी वापस कायम हो सकता है, जब जांच निष्पक्ष तरीके से हो और “सिर्फ मोहरों को नहीं, सरगनाओं को पकड़ा जाए।” बयान में CID के शीर्ष अधिकारी मनोज कौशिक से भी सवाल पूछा गया है। आरोप लगाया गया कि आखिर जांच एजेंसी JSSC के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी से पूछताछ को लेकर क्या रुख अपना रही है और क्या किसी स्तर पर किसी अधिकारी को जांच से बाहर रखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में CID या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। बयान में आशंका जताई गई है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जांच में बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश हो रही हो। इसमें ‘आप मुझे बचाएं, मैं आपको बचाऊंगा’ जैसी रणनीति अपनाए जाने की आशंका भी जताई गई है। यह आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन इनके समर्थन में फिलहाल कोई स्वतंत्र या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच पूरी होने तक इन दावों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। बयान में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते से जुड़े मामले का उदाहरण देते हुए कहा गया कि पूर्व में भी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़े अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई है। इसी संदर्भ में सवाल उठाया गया कि JSSC मामले में भी जांच एजेंसी को हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से छात्र आंदोलन चल रहा है। अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। ऐसे में CID जांच को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर अब इस बात पर है कि जांच एजेंसी आगे किन अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ करती है और क्या जांच के आधार पर किसी बड़ी कार्रवाई तक पहुंचती है।प्रशांत कुमार से पूछताछ को लेकर सवाल
‘सिर्फ मोहरों को नहीं, सरगनाओं को पकड़ें’
CID की भूमिका पर भी उठाए सवाल
‘क्या बड़े अधिकारियों को बचाने का खेल चल रहा?’
ख्यांगते मामले का दिया गया उदाहरण
छात्रों के भरोसे का सवाल














