रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में EWS और OBC प्रमाणपत्रों को लेकर अलग-अलग मापदंड अपनाए जाने का दावा सामने आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी प्रमाणपत्र के साथ सत्यापन वर्ष का प्रमाणपत्र भी मांगा जा रहा है, जबकि दूसरी नियुक्ति में केवल सत्यापन वर्ष के प्रमाणपत्र को आधार बनाकर अनुशंसा की गई।

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर अलग-अलग नियम लागू होने से परीक्षा पास करने के बावजूद EWS और OBC वर्ग के कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रभावित हो रही है।

महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में अलग प्रक्रिया का दावा

अभ्यर्थियों के अनुसार, महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति में अद्यतन EWS और OBC प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई। दावा है कि कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी नियुक्त हुए, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाणपत्र नहीं था।

कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद विभागीय स्तर पर नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।

माध्यमिक आचार्य परीक्षा में 50 से अधिक रिजल्ट रोके जाने का दावा

वहीं, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में विभिन्न विषयों के लिए प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए बुलाए गए 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोके जाने का दावा किया गया है।

अभ्यर्थियों के अनुसार, उनसे आवेदन के समय और प्रमाणपत्र सत्यापन के समय, दोनों वित्तीय वर्षों के EWS और OBC प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं।

उर्दू अभ्यर्थी से आवेदन अवधि का प्रमाणपत्र मांगा

माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में उर्दू विषय के एक अभ्यर्थी से आवेदन की अंतिम तिथि तक अथवा उससे पहले जारी EWS प्रमाणपत्र मांगे जाने की बात कही गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर नियम निर्धारित हैं तो उन्हें JSSC की सभी नियुक्ति प्रक्रियाओं में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों ने की समान नियम लागू करने की मांग

अभ्यर्थियों का कहना है कि अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में प्रमाणपत्रों को लेकर अलग-अलग मापदंड अपनाए जाने से भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। उनकी मांग है कि आयोग प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर स्पष्ट नियम जारी करे और सभी नियुक्तियों में एक समान व्यवस्था लागू करे।