रांची: झारखंड में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के नियमों में संशोधन कर इसे पहले से अधिक छात्रहितैषी बनाया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू संशोधित नियमों के तहत अब विद्यार्थियों को ऋण लेने के लिए मार्जिन मनी जमा नहीं करनी होगी। इसके साथ ही प्रथम वर्ष या प्रथम सेमेस्टर में अपनी जेब से जमा की गई पात्र संस्थागत फीस की राशि वापस पाने का भी प्रावधान किया गया है।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में संशोधित गजट जारी किया गया है। योजना का उद्देश्य झारखंड के जरूरतमंद और मेधावी विद्यार्थियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र विद्यार्थियों को अधिकतम 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिल सकता है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक करीब 2,600 विद्यार्थियों के लिए 264 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। इनमें से लगभग 65 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

पहले साल की फीस वापस पाने का मिलेगा मौका

गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना में सबसे अहम बदलाव प्रथम वर्ष या प्रथम सेमेस्टर की फीस के पुनर्भरण को लेकर किया गया है। पहले कई शिक्षण संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया महज 10 से 15 दिनों में पूरी हो जाती थी। इतनी कम अवधि में बैंक से शिक्षा ऋण स्वीकृत कराकर राशि प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए मुश्किल हो जाता था।

इस वजह से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को अपनी जेब से संस्थान की फीस और अन्य संबंधित खर्चों का भुगतान करना पड़ता था। पहले ऐसे खर्चों की वापसी के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से आर्थिक परेशानी बढ़ जाती थी।

अब संशोधित नियमों के तहत प्रथम सेमेस्टर या प्रथम वर्ष में भुगतान की गई पात्र फीस का एकमुश्त पुनर्भरण किया जा सकेगा। इसके लिए विद्यार्थियों को वैध दस्तावेजों के साथ योजना के पोर्टल के माध्यम से दावा करना होगा। दावा निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान के छह महीने के भीतर करना जरूरी होगा।

इस बदलाव से उन विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें दाखिले के समय फीस का इंतजाम करने में कठिनाई होती है।

अब जमा नहीं करनी होगी मार्जिन मनी

योजना में दूसरा बड़ा बदलाव मार्जिन मनी की अनिवार्यता को समाप्त करना है। पहले चार लाख रुपये से अधिक के शिक्षा ऋण पर विद्यार्थियों को कुल ऋण राशि का पांच प्रतिशत हिस्सा मार्जिन मनी के रूप में जमा करना पड़ता था।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह अतिरिक्त राशि जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। अब संशोधित नियमों के तहत मार्जिन मनी की शर्त हटा दी गई है। इससे पात्र विद्यार्थियों को ऋण लेने के लिए अपनी ओर से यह राशि जमा नहीं करनी होगी।

सरकार के इस कदम से उच्च शिक्षा के लिए बैंक ऋण पर निर्भर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।

प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को भी योजना में शामिल किया गया

संशोधित गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना का दायरा बढ़ाते हुए कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इनमें साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, नालंदा विश्वविद्यालय और इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के साथ राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय जैसे संस्थान शामिल हैं।

इसके अलावा केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी एवं अप्लाइड न्यूट्रिशन से जुड़े संस्थानों के साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है।

इस विस्तार से विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में उच्च और व्यावसायिक शिक्षा हासिल करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

विद्यार्थियों के लिए क्या बदलेगा?

संशोधित नियमों से विद्यार्थियों को तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे। पहला, चार लाख रुपये से अधिक के ऋण पर पहले लागू पांच प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करने की बाध्यता समाप्त होगी। दूसरा, निर्धारित शर्तों और समयसीमा के भीतर दावा करने पर प्रथम वर्ष या प्रथम सेमेस्टर की पात्र फीस का पुनर्भरण मिल सकेगा। तीसरा, अधिक प्रतिष्ठित और विशिष्ट शिक्षण संस्थानों को शामिल किए जाने से योजना का दायरा बढ़ेगा।