सरायकेला: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के दुगनी स्थित रामकृष्ण फोर्जिंग लिमिटेड कंपनी में गुरुवार सुबह मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह छह बजे से ही मजदूरों ने कंपनी के सभी गेट जाम कर काम का बहिष्कार कर दिया। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन पर श्रम नियमों के उल्लंघन, कम मजदूरी देने और जबरन अधिक समय तक काम कराने का आरोप लगाया।

तीन साल बाद सिर्फ 13 रुपये की बढ़ोतरी का आरोप

प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन की ओर से उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही है। मजदूरों के अनुसार, तीन साल बाद वेतन वृद्धि के नाम पर मात्र 13 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

मजदूरों ने कहा कि लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें उनकी अपेक्षा के अनुरूप मजदूरी नहीं मिल रही है। उनका आरोप है कि वेतन वृद्धि और काम की परिस्थितियों को लेकर प्रबंधन की नीति से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

16 घंटे तक काम कराने का आरोप

मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन पर दबाव बनाकर 16-16 घंटे तक काम कराने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्धारित समय से अधिक काम करने के बावजूद अतिरिक्त काम के लिए नियमानुसार दोगुना भुगतान नहीं किया जाता है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक काम करने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

नौकरी से निकालने की धमकी देने का भी आरोप

कुछ मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उसे तानाशाहीपूर्ण बताया। उनका कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं और मांगें प्रबंधन के सामने रखते हैं, तो उन्हें नौकरी से निकालने तक की धमकी दी जाती है।

मजदूरों के अनुसार, इस तरह के दबाव के कारण कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी नाराजगी के चलते मजदूरों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और कंपनी के सभी गेट जाम कर काम का बहिष्कार किया।

कंपनी के कामकाज पर असर, प्रबंधन की प्रतिक्रिया नहीं

मजदूरों के आंदोलन के कारण कंपनी के कामकाज पर असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं और मजदूरी तथा कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे हैं।

मामले में कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। ऐसे में मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों पर कंपनी का पक्ष सामने नहीं आ सका है।

अब इस मामले में आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। मजदूरों की मांगों, न्यूनतम मजदूरी और काम के घंटों से जुड़े आरोपों पर संबंधित प्रबंधन तथा श्रम विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।