रांची:  झारखंड में कृषि को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में मंगलवार को नेपाल हाउस स्थित कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के कार्यालय में ICRISAT के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में राज्य की कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए ICRISAT की विशेषज्ञता के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में कृषि विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी, विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी और कृषि निदेशक विद्यानंद पंकज समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

ICRISAT के अधिकारियों ने संस्थान के कार्यों और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर प्रस्तुति दी। इस दौरान जियो-स्पेशियल टेक्नोलॉजी, GIS, सैटेलाइट इमेजरी और मशीन लर्निंग के माध्यम से झारखंड में फसल और भूमि की सटीक मैपिंग की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई।

तकनीक की मदद से यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कौन-सी फसलें उगाई जा रही हैं, किस भूमि पर कौन-सी फसल उपयुक्त है, अपलैंड क्षेत्रों में किस तरह की खेती हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों में क्रॉपिंग इंटेंसिटी कितनी है।

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए तैयार होगी कृषि रणनीति

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड जैसे भौगोलिक और कृषि विविधता वाले राज्य में एक क्षेत्रएक कृषि रणनीतिप्रभावी नहीं हो सकती। अलग-अलग क्षेत्रों की भूमि, मिट्टी, वर्षा और जल उपलब्धता के अनुसार फसल चयन और कृषि योजनाओं का निर्धारण जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ICRISAT की तकनीक से प्राप्त डेटा के आधार पर यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल बेहतर होगी, किसानों को किस प्रकार के बीज उपलब्ध कराए जाएं और कृषि योजनाओं का हस्तक्षेप किन क्षेत्रों में किस रूप में किया जाए।

मिट्टी की अम्लीयता और घटती उर्वरता पर भी जोर

बैठक में झारखंड के कई क्षेत्रों में मिट्टी की अत्यधिक अम्लीयता और घटती उर्वरता को भी चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।

ICRISAT की ओर से सैटेलाइट तकनीक, GIS और मशीन लर्निंग के माध्यम से मिट्टी और फसल पैटर्न का वैज्ञानिक डेटा तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके आधार पर मिट्टी के pH और अम्लीयता में सुधार के लिए चूना उपचार, जैविक प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा सकती है।

दलहन, तिलहन और जलवायु-सहिष्णु बीजों की उपलब्धता बढ़ाने में भी इस तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

सिंचाई समेत अन्य विभागों को भी मिलेगा लाभ

मंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। सटीक भूमि और फसल डेटा सिंचाई विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के लिए भी उपयोगी होगा। इससे किसी क्षेत्र की भूमि और फसल के अनुरूप प्रभावी सिंचाई व्यवस्था तय करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि डेटा आधारित योजना निर्माण से सरकारी योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों तक सही तकनीक व कृषि इनपुट पहुंचाने में मदद मिलेगी।

ICRISAT के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों में तकनीकी सेवाओं और डेटा आधारित कृषि समाधानों पर काम कर रहा है।

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड में कृषि विकास का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि को सक्षम बनाना है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की कृषि व्यवस्था को अनुमान और पारंपरिक आंकड़ों से आगे बढ़ाकर सटीक डेटा और वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित करने की दिशा में काम किया जाएगा।